चौसाना। यमुना बांध पर स्थित भड़ी गांव में लाखों खर्च कर बनाए गए उपस्वास्थ्य केंद्र को सालों बीतने के बाद भी मूर्त रूप नहीं दिया जा सका। आलम यह है कि केंद्र की ईंट भी गांव के शरारती तत्व उखाड़ ले गए, लेकिन विभागीय अधिकारियों को इसकी कोई खैर-खबर तक नहीं है।
गांव का जच्चा-बच्चा केंद्र मूर्त रूप में आने की बाट जोह रहा है, लेकिन अस्पताल अपनी बदहाली के कारण पशुओं का आसरा बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि जच्चा-बच्चा केंद्र न होने से बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। चौसाना से पांच किमी की दूरी पर स्थित यमुना खादर के गांव भड़ी की आबादी करीब छह हजार है। भड़ी से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की दूरी 15 किमी की है। गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान लंबी दूरी होने के कारण कई समस्याओं सामना करना पड़ता है।
ग्रामीण कामिल हज्जी, हारून, गुलजार, तासीन, मजीद, यूनुस ने बताया कि सपा सरकार के आने पर गांव में जच्चा-बच्चा केंद्र का निर्माण का कार्य शुरू किया गया था। जिससे ग्रामीणों को प्रसव के दौरान महिलाओं को आने वाली समस्याओं से निजात पाने की आस जगी थी। निर्माण शुरू हुआ तो कुछ ही महीनों में भवन बनकर तैयार हो गया, लेकिन समय बीतने के बाद विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते जच्चा-बच्चा केंद्र पर पेंट तक नहीं हो सका।
जिसके चलते यह भवन लगता ही नहीं कि महिलाओं के लिए बनाया गया जच्चा-बच्चा केंद्र हो। गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान 15 किमी दूर ऊन के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या फिर 20 किमी दूर गंगोह जनपद सहारनपुर के निजी नर्सिंगहोम का रास्ता देखना पड़ता है। गांव के लोगों ने वर्तमान सरकार के मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजकर जच्चा-बच्चा केंद्र की बदहाली को दूर करने की मांग की है।
कोट...
उपस्वास्थ्य केंद्र की जर्जर स्थिति से कई बार विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया। अधिकारी मौके पर आए और निरीक्षण कर उसमें सुधार का आश्वासन भी दिया, लेकिन अभी तक उस कोई काम नहीं हो सका। - नजाकत, ग्राम प्रधान भड़ी
- भड़ी में स्वास्थ्य उप केंद्र की हालत जर्जर है केंद्र की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही ठीक कराया जाएगा। - डॉ. नवजीत बेदी, ब्लॉक चिकित्सा प्रभारी।