इमरान के पकड़े जाने के बारे में मोहल्ले के लोग कुछ भी बोलने से बचते रहे। मोहल्लेवासियों का कहना है कि पुलिस तो आई थी, लेकिन किसे पकड़ा और क्या बरामद हुआ, इसके बारे में उन्होंने जानकारी होने से इंकार कर दिया। साथ ही आरोपी के साथ इस धंधे में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं, उसके बारे में भी जानकारी जुटाने में लगी है। एसटीएफ का फोकस आरोपी का पाकिस्तान कनेक्शन तलाश रही है।
प्रिंटिंग मशीन से छापे गए नकली नोट
एसटीएफ को इमरान के घर से जो नकली नोट बरामद हुए हैं, वे सभी किसी कलर प्रिंटिंग मशीन से छापे गए हैं। सभी नोट 100 व 50 के छापे गए हैं और नए नोट की नकल कर बनाए गए हैं। 100 व 50 के नकली नोट छापने के पीछे यह माना जा रहा है कि आमतौर पर लोग छोटे नोट को लेकर असली-नकली पर ज्यादा ध्यान नहीं देते और बाजार में उन्हें चलाने में आसानी हो सके।
पहले भी नकली करेंसी को लेकर चर्चाओं में रहा शामली
कैराना का नकली नोटों से पुराना नाता रहा है। 90 के दशक में गठरी व्यवसाय के बाद कैराना की कुछ तस्कर नकली नोटों की व्यापार में लग गए थे। सवा महीने पहले भी दिल्ली स्पेशल सेल ने कैराना के सर्राफा व्यापारी सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए साढ़े पांच लाख रुपये के नकली नोट बरामद किए थे।
24 जून को दिल्ली स्पेशल सेल ने हरियाणा दिल्ली बॉर्डर से कैराना निवासी ताजिम को 2.51 लाख के नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया था। ताजिम से पूछताछ के बाद खुलासा हुआ था कि कैराना के पुराना बाजार में सराफा की दुकान करने वाला सर्राफा व्यापारी इरशाद उर्फ भुरू नकली नोट छापने का मुख्य आरोपी है। दिल्ली स्पेशल सेल ने पुराना बाजार में सर्राफा व्यापारी इरशाद उर्फ़ भुरू की दुकान और मकान पर दबिश दी थी। यहां से दिल्ली स्पेशल सेल ने तीन लाख के नकली नोट बरामद किए थे। दिल्ली स्पेशल सेल ने कैराना निवासी ताजिम और इरशाद उर्फ भुरू का चालान करके दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया था जहां से दोनों को तिहाड़ जेल भेज दिया था।
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