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Shamli News: भैंसवाल अंडरपास निर्माण का मामला रेलवे मंत्रालय पहुंचा

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शामली। भैंसवाल में अधूरे अंडरपास निर्माण के मामले में उत्तर रेलवे दिल्ली मंडल के अधिकारियों ने अपना जवाब भेज दिया है। रेलवे के अधिकारियों ने अपने जवाब में कहा कि लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के अफसरों ने आठ करोड़ 39 लाख के सापेक्ष चार करोड़ 15 लाख की धनराशि दी है। रेलवे इस धनराशि का कार्य पूरा कर चुकी है।
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भैंसवाल नवीन मुख्यालय से दिल्ली-सहारनपुर हाईवे को जोड़ने के लिए 3.5 किमी लंबाई का बाईपास में अंडरपास स्वीकृत किया गया था। 17 करोड़ रुपये की लागत से बाईपास का निर्माण कार्य पांच साल पहले हो चुका है। रेलवे अंडरपास का निर्माण कार्य पूरा न होने से बाईपास चालू नहीं हो पाया है। रेलवे अंडरपास के निर्माण के लिए जिले के लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड शामली ने चार करोड़ 15 लाख रुपये की धनराशि रेलवे को भेजी थी। रेलवे ने वर्ष 2023-24 में टेंडर छोड़कर कार्य शुरू किया।
रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक, मिली धनराशि से अंडरपास का कार्य किया गया है। अंडरपास निर्माण के लिए अतिरिक्त धनराशि लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड ने परियोजना खत्म होने की बात कहकर इंकार कर दिया है।
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रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि आठ करोड़ 39 लाख के सापेक्ष 4 करोड़ 15 लाख की धनराशि जारी की गई थी। जारी की गई धनराशि से रेलवे की ओर से कार्य किया गया है। जिला पंचायत सदस्य उमेश पंवार ने बागपत के सांसद राजकुमार सांगवान से मिलकर भैंसवाल अंडरपास के मामले की जानकारी देकर अधूरे अंडरपास के निर्माण की मांग उठाई थी। सांसद ने पूरे मामले की जानकारी रेलवे मंत्रालय को भेजी थी। भैंसवाल अंडरपास के मामले में दिल्ली मंडल के अभियंता ने शामली के रेलवे के सहायक अभियंता से जानकारी मांगी थी।
दिल्ली मंडल के सहायक अभियंता वीरेंद्र सिंह के मुताबिक भैंसवाल अंडरपास निर्माण के लिए आठ करोड़ 39 लाख का एस्टीमेट शामली के लोक निर्माण विभाग की ओर से दिया गया था। आठ करोड़ 39 लाख के एस्टीमेट के सापेक्ष चार करोड़ 15 लाख की धनराशि का कार्य रेलवे पूरा कर चुका है। अवशेष धनराशि न मिलने से भैंसवाल अंडरपास का कार्य अधूरा है। इस मामले में रेलवे के वरिष्ठ मंडल अभियंता को जवाब भेज दिया गया है।
- देरी के लिए रेलवे जिम्मेदार

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजकुमार सिंह का कहना है कि परियोजना में रेलवे विभाग ने देरी की। पूरी धनराशि रेलवे को भेजी गई थी। परियोजना खत्म हो चुकी है। विभाग से नई धनराशि मिलना संभव नहीं है।
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