शामली, कैराना। कैराना बार एसोसिएशन चुनाव का बिगुल बज चुका है। देश की आजादी से पहले कैराना में न्यायपालिका की स्थापना की गई थी। कैराना न्यायपालिका व बार एसोसिएशन का गौरवमयी इतिहास 135 साल पुराना है। 1889 में अग्रेजों ने कैराना में मुंसिफ कोर्ट की स्थापना की थी। मुंसिफ कोर्ट को आज के समय में सिविल जज जूनियर डिविजन कहा जाता है। कैराना में जनपद न्यायालय कई वर्षों से अपना कार्य कर रहा है।
बार एसोसिएशन के वर्तमान अध्यक्ष ब्रह्म सिंह ने बताया कि कैराना में पहली बार 1889 में मुंसिफ कोर्ट खुली थी। 1889 में अधिवक्ता को मुख्तार कहा जाता था। 1961 में एडवोकेट एक्ट आने के बाद मुख्तार से नाम बदल कर अधिवक्ता हो गया।
मुंसिफ कोर्ट बनने के करीब 91 साल बाद यहां सिविल जज सीनियर डिविजन की दो कोर्ट बनीं। पहले कचहरी में केवल 10-12 मुख्तार (अधिवक्ता) हुआ करते थे, लेकिन आने वाली 23 दिसंबर को होने वाले बार एसोसिएशन के चुनाव में 374 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। सेना की नौकरी छोड़ने के बाद वरिष्ठ भाजपा सांसद स्व. बाबू हुकुम सिंह अधिवक्ता बने। उनके प्रयासों से दो फरवरी 2002 में कैराना को दो अपर जिला व सत्र न्यायालय मिले।
13 अगस्त 2018 में मुजफ्फरनगर से शामली जनपद अलग होने के बाद कैराना में जनपद न्यायालय की स्थापना हुई। कैराना में जनपद न्यायालय, परिवार न्यायालय, बाल न्यायालय सहित 14 अदालतें काम कर रही है। (संवाद)