इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयुष मलिक धर्मांतरण प्रकरण में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई की है। हाईकोर्ट ने आयुष के पिता देवराज मलिक को 16 सितंबर को उसे कोर्ट में पेश करने का नोटिस जारी किया है। यह याचिका आयुष के दोस्त मोहम्मद सुल्तान ने दायर की थी। याचिका में पिता पर आयुष को अवैध हिरासत में रखने का आरोप लगाया गया है।
कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि आयुष मलिक को निर्धारित तारीख पर पेश नहीं किया जाता है, तो पुलिस अधीक्षक और थानाध्यक्ष को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करना होगा। हलफनामे में युवक को पेश न कर पाने का कारण बताना होगा। साथ ही, उसे कोर्ट में प्रस्तुत करने के लिए की गई कार्रवाई की जानकारी भी देनी होगी। यह मामला तीन माह पहले सामने आया था। दवा कारोबारी देवराज मलिक ने छह जून को शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि जिम ट्रेनर चांदनी कुरैशी ने संपत्ति हड़पने के लिए उनके बेटे आयुष मलिक को प्रेम जाल में फंसाकर धर्मांतरण कराया।
धर्मांतरण प्रकरण की पृष्ठभूमि
दर्ज प्राथमिकी में चांदनी कुरैशी, उनके पिता इस्लाम कुरैशी और तीन मौलवी सहित आठ लोग आरोपी बनाए गए थे। पुलिस ने इस मामले में चांदनी कुरैशी और उनके पिता समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था। देवराज मलिक ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे का धर्मांतरण संपत्ति हड़पने के उद्देश्य से किया गया था। यह मामला शहर में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।
पिता और पुलिस की प्रतिक्रिया
पुलिस अधीक्षक एनपी सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश का पूरी तरह अनुपालन कराया जाएगा। उन्होंने पुष्टि की कि आयुष मलिक को 16 सितंबर को पेश करने का नोटिस पिता को जारी हुआ है। उधर, आयुष के पिता देवराज मलिक का कहना है कि उन्हें अभी तक हाईकोर्ट का कोई नोटिस नहीं मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि आयुष मलिक अपनी दवा की दुकान पर नियमित रूप से काम कर रहा है। देवराज मलिक के अनुसार, आयुष स्वतंत्र है और किसी की हिरासत में नहीं है।