शामली। जिले के विभिन्न स्वास्थ्य उपकेंद्रों में बिना टेंडर के ही पांच करोड़ रुपये से अधिक के निर्माण और मरम्मत कार्य कराए जाने का मामला सामने आया है। रामपुर मनिहारान के विधायक देवेंद्र निम की शिकायत पर गठित तीन सदस्यीय समिति की जांच में यह अनियमितता उजागर हुई है। जांच रिपोर्ट जिला अधिकारी को भेज दी गई है।
विधायक ने सहारनपुर मंडल के आयुक्त डॉ. रूपेश कुमार से शिकायत करते हुए बताया था कि जिला चिकित्सालय और ग्रामीण क्षेत्र की चिकित्सकीय इकाइयों के भवनों के निर्माण और विशेष मरम्मत कार्यों के लिए वित्तीय वर्ष 2025–26 और 2026–27 के लिए धनराशि आवंटित की गई थी, लेकिन इसमें कई तकनीकी और वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं।
बताया कि मुख्य चिकित्साधिकारी शामली ने एक जनवरी 2025 के पत्र में वर्ष 2026–27 की निविदा निरस्त कर दी, जबकि वर्ष 2025–26 के लिए निविदाओं और अनुबंधों का क्रियान्वयन जारी रखा गया। जबकि दोनों वर्षों के लिए एक साथ अनुबंध किया गया था। ऐसे में केवल एक वर्ष की निविदा निरस्त करना और दूसरे वर्ष के अनुबंध जारी रखना संदेह के घेरे में है।
आरोप लगाया कि जांच लंबित रहने के बावजूद चालू निविदा के ठेकेदारों को लगभग 1.40 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा रहा था, जबकि कार्य प्रारंभ कराने के आदेश भी जारी कर दिए गए थे।
आयुक्त के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी और एडीएम सत्येंद्र कुमार सहित तीन सदस्यीय समिति गठित की गई। जांच में सामने आया कि स्वास्थ्य उपकेंद्रों की मरम्मत के लिए बिना टेंडर ही करीब पांच करोड़ रुपये के कार्य दर्शा दिए गए, जबकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ये कार्य किन-किन स्वास्थ्य केंद्रों में कराए गए। इससे वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई गई है।
एडीएम सत्येंद्र कुमार ने बताया कि जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है और आगे की कार्रवाई उनके स्तर से की जाएगी।
विधानसभा में भी उठा था मामला
विधायक देवेंद्र निम ने फरवरी माह में इस मामले को विधानसभा में भी उठाया था। उनका आरोप था कि स्वास्थ्य उपकेंद्रों में कार्यों के नाम पर बड़ा गोलमाल किया गया है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सीएमओ ने आरोपों से किया इनकार
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल कुमार का कहना है कि बिना टेंडर के पांच करोड़ रुपये के निर्माण कार्य कराने का आरोप गलत है। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी कराई जा रही है।