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जमीन पर कब्जा लेने पहुंचे निर्माण कंपनी के कर्मचारियों को बैरंग लौटाया

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संवाद न्यूज एजेंसी
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बाबरी। दिल्ली-देहरादून इकोनामिक कॉरिडोर निर्माण के लिए किसानों की भूमि पर कब्जा लेने के उद्देश्य से पहुंचे निर्माण कंपनी के कर्मचारियों को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा। किसान जेसीबी के सामने लेट गए। भारी विरोध के कर्मचारियों को बाबरी से बैरंग लौटना पड़ा।
दिल्ली-देहरादून इकोनामिक कॉरिडोर के निर्माण के दायरे में जिले के 22 गांवों की भूमि आ रही है। अधिग्रहण में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए किसान संघर्ष समिति दिल्ली-देहरादून इकोनामिक कॉरिडोर ने बुटराड़ा व करौदा हाथी स्टैंड के समीप अनिश्चितकालीन धरना प्रारंभ किया गया था। बुधवार को धरना स्थल पर किसान महापंचायत का आयोजन किया गया था। जिसमें मुख्य वक्ता भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत रहे। किसान महापंचायत में भी अनिश्चितकालीन धरना चालू रखने और निर्माण कंपनी के कर्मचारियों को खेतों में न घुसने देने की घोषणा की गई थी।
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इसके बावजूद बृहस्पतिवार को निर्माण कंपनी के कर्मचारी जेसीबी मशीनों के साथ बाबरी के किसान गुरुनाम सिंह आदि के खेत पर पहुंच गए। जिसकी सूचना गुरुनाम सिंह ने बुटराड़ा धरना पर किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष ठाकुर वीर सिंह और सचिव विदेश मलिक को दी। सूचना मिलने पर बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर ट्रालियों से मौके पर पहुंचे और कंपनी के कर्मचारियों का विरोध किया। विरोध के दौरान किसान हाजी तुफैल भैसानी व देवी सिंह लांक ने जेसीबी मशीन के सामने लेट कर विरोध किया। साथ कहा कि मशीन पहले किसानों के ऊपर से गुजरेगी। किसानों के विरोध के बाद कंपनी कर्मचारी मशीनों के साथ बैरंग लौट गए। जिसके बाद किसान भी बुटराड़ा धरना स्थल लौट गए।
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मांगे पूरी होने तक जारी रहेगा धरना
बुटराड़ा में धरना स्थल पर 29वें दिन हुई सभा में किसानों ने फिर दोहराया की निर्माण कंपनी का कोई भी कर्मचारी मांग पूरी होने से पहले खेत में घुसा तो अंजाम बुरा होगा। सभा की अध्यक्षता मास्टर राधा कृष्ण और संचालन समिति के सचिव विदेश मलिक ने किया। धरना स्थल पर युवा वक्ता शुभम मलिक ने एक सड़क एक टोल एक मुआवजा एक मोल का नारा दिया। मनोज खानपुर, शुभम मलिक, बिजेंद्र सिंह बाबरी, प्रमोद जागलान, वीरपाल सिंह आर्य लांक, मास्टर महावीर, शिवकरण सिंह, हाजी तुफैल आदि मौजूद रहे।
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