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इंसानियत की दुश्मन है सांप्रदायिकता

Mon, 15 May 2017 12:21 AM IST
शामली, अमर उजाला ब्यूरो
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cultural - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कैराना।  देश को आजाद कराने में उलमा का अहम योगदान रहा है, लेकिन कुछ लोग देश को सांप्रदायिकता की आग में झोंकना चाह रहे हैं। ऐसे लोग कभी देश के हितैषी नहीं हो सकते हैं। हजरत मौलाना सैयद सलमान नदवी ने कहा कि इंसान और इंसानियत की दुश्मन है सांप्रदायिकता।
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नगरपालिका के बरातघर में अंजुमन-खिदमत-ए खल्क की ओर से आयोजित देश व समाज की समस्या के उत्थान के विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में हजरत मौलाना सैयद सलमान नदवी ने कहा कि अंग्रेजों ने बरतानिया से कोलकाता पहुंचकर अपना व्यापार शुरू किया।  इसकी आड़ में अंग्रेजों ने हथियार सप्लाई करके उनका जखीरा एकत्र किया और आतंकवाद की शुरूआत कर दी।

धीरे-धीरे देश पर कब्जा करना शुरू कर दिया। इस दौरान देश से प्रेम करने वाले  रिजुद्दौला ने अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया। अंग्रेजों के दांत खट्टे करने का बेड़ा उलमा ने उठाया। आजादी की लड़ाई में हजारों उलमा ने अपनी जान कुर्बान की थी। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को बदनाम करने तथा असल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए तीन तलाक को मुद्दा बनाया गया है। 
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समाज में फैली बराइयों को समाप्त करने के लिए आगे आएं। शादियों में ज्यादा खर्च न करें और गरीब बच्चियों की शादी करके उनकी खुशी तथा गमी में शरीक हों। अधिक खर्च वाली शादियां ही अधिकतर तलाक में तब्दील होकर रह जाती हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉक्टर काशिफ, हाजी अबरार, हाजी नसीम, हाजी जाहिद, कारी अनीस, आसिम, मोहम्मद फरहान आदि का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। 

इस अवसर पर लखनऊ से आए हजरत मौलाना सलमान नदवी ने जामिअतुस्सादा के प्रबंध संचालक हजरत मौलाना मो. इरफान साकिब द्वारा लिखी गई दो उर्दू पुस्तकों ’मॉडर्न औरत और इस्लाम’ व अत्तजवीद नामक का विमोचन किया। इस दौरान मास्टर ताहिर, पूर्व चेयरमैन हाजी अब्दुल अजीज अंसारी के साथ साथ अन्य उलमा मौजूद रहे।
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