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अपनों के खून से रंग रहे हाथ, मर्यादा हो रही तार-तार

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जिले में अपने ही बन रहे जान के दुश्मन
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शामली। आज के भौतिकवादी युग में अपने ही अपनों की जान के दुश्मन बन रहे हैं। जिले में करीब दो माह में चार ऐसी घटनाएं हुई है, जिनमें रिश्तों का खून हुआ है और सामाजिक मान-मर्यादाएं तार-तार हुई है। कहीं भाई ने भाई को मार डाला, कहीं पत्नी ने पति को तो कहीं पुत्र ने पिता को सुपारी देकर मौत के घाट उतरवा दिया।
केस- एक
ताजा मामला गांव मुंडेट कलां का है। दो दिन पहले रविवार रात को किसान पवन घर से खेत पर गेहूं की फसल की निगरानी करने के लिए गया था। सोमवार सुबह उसका रक्तरंजित शव उसके ईंख के खेत में मिला था। पुलिस ने इसमें मृतक के पुत्र अमित व गांव के नीरज व मिंटू को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया था कि अमित ने नीरज व मिंटू को दो लाख रुपये की सुपारी देकर अपने पिता की हत्या कराई थी।
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केस-दो
आदर्श मंडी थानाक्षेत्र के गांव गोहरनी में 17 जनवरी को घर के बाहर तेजपाल उर्फ तेजू का शव बरामद हुआ था। दो दिन बाद पुलिस ने हत्या के आरोप में मृतक की पत्नी पिंकी को गिरफ्तार कर खुलासा किया था कि पति की गलत आदतों से परेशान होकर उसने सिर पर हथौड़े से वार कर हत्या कर दी और 24 घंटे तक शव को घर में ही छिपाए रखा था।
केस-तीन
10 जनवरी को गढ़ीपुख्ता क्षेत्र के गांव भाटू के जंगल में संजय निवासी गांव पिंडोरा जहांगीरपुर का शव मिला था। पुलिस ने हत्या के आरोप में मृतक के सगे भाई बबलू को गिरफ्तार किया था। बबलू ने अपने भाई संजय की हत्या महज इसलिए कर दी थी कि छह जनवरी को किसी बात को लेकर हुए विवाद संजय ने अपने पिता पर फावड़े की मूंठ से वार कर दिया था, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। पिता की हत्या का बदला लेने के लिए भाई ने भाई की हत्या कर दी थी।
केस-चार
दो माह पहले 19 दिसंबर को गांव खंदरावली में गन्ना पर्यवेक्षक की बैठक के स्थान को लेकर हुए विवाद को लेकर हुई फायरिंग कर्मवीर और राहुल की गोली लगने से मौत हो गई थी। घटना में निवर्तमान प्रधान सोमपाल और उसके पुत्र समेत तीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। मृतक कर्मवीर आरोपी सोमपाल का सगा भतीजा था।
एकल परिवार बढ़ने के साथ ही सामाजिक मान-मर्यादाएं खत्म हो रही है। अकेलापन होने के कारण मन में कुंठा बढ़ रही है, जिस कारण रिश्तों और मान मर्यादा की कोई परवाह नहीं होती। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समाज के जागरूक लोगों को आगे आना होगा।
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- डा. विनीत चौहान, समाज शास्त्री।
जीवन के हर क्षेत्र में जरूरत से अधिक अपेक्षाएं धीरे-धीरे कुंठा और अवसाद का रूप लेती है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आवश्यकता भर में संतुष्टि खोज लेना और खुशियों के अवसर स्वीकृति की सहजता से जीने की कला ही इसका समाधान है।
- डॉ. अजय बाबू शर्मा, मेंटल हेल्थ मेंटर मुस्कराएगा इंडिया अभियान, एनएसएस।
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