जलालाबाद (मुजफ्फरनगर)। कौमी एकता कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी ने कहा कि वतन में पैदा होने वाले हर मुसलमान का फर्ज वतन की हिफाजत करना है। उन्होंने देश के विभाजन को कौम के लिए सबसे बड़ा नुकसान बताया।
कार्यक्रम में उन्होंने कौम की एकता एवं तरक्की के लिए सबसे अधिक शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने यूपी का राज्यपाल रहते हुए जौहर मुस्लिम यूनिवर्सिटी की मंजूरी को कौम के लिए सबसे नायाब तोहफा करार दिया। हालांकि उनके समकक्ष साथियों ने इस बिल पर हस्ताक्षर न करने के लिए दबाव बनाया था, लेकिन कौम की तरक्की व शिक्षा को तवज्जो देते हुए उन्होंने पद की कुर्बानी देकर बिल पर हस्ताक्षर किए।
उस काम को करके जो सुकून मिला उसे बयां करना मुमकिन नहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना लियाकत अली संचालन नरेश शर्मा ने किया। इस दौरान नानौता चेयरमैन अफजाल खान, माजिद मलिक, मकबूल मलक, वाकत खान, असलम मंसूरी, नियामतुल्ला चौधरी, आकिल मलक, आदिल राणा आरिफ राणा कामरान खान, शमशाद मलिक आदि थे।
जाति धर्म के नाम पर गुमराह न हों युवा
थानाभवन। पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी ने कहा कि देश के युवाओं को धर्म-जाति के नाम पर गुमराह नहीं होना चाहिए। युवा पूरे दिलोदिमाग से राष्ट्रहित में सकारात्मक सहयोग दें। युवा देशहित के बारे में सोचेगा तभी देश मजबूत होगा।
बृहस्पतिवार को थानाभवन में मुस्लिम राजपूत वेलफेयर एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष हाजी राव जमशेद के निवास पर पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि युवा देश के कर्णधार हैं। युवा धर्म-जाति की संकीर्ण सोच से ऊपर उठें। युवाओं को फिरकापरस्त तत्वों का मुकाबला करना होगा ताकि मुल्क में अमन चैन कायम रहे।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास चुराए गए परमाणु बम हैं, जबकि हिंदुस्तान के पास यहां के वैज्ञानिकों द्वारा बनाए गए परमाणु बम हैं। अगर पाकिस्तान भारत पर परमाणु बम गिराने की गलती करता है, तो भारत में एक सीमित क्षेत्र का नुकसान होगा, जबकि पाकिस्तान पूरी तरह से तहस-नहस हो जाएगा। राज्यपाल पद से हटाए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी से संबंधित बिल पर हस्ताक्षर करना ही उनका पद से हटाए जाने का मुख्य कारण रहा।
उन्होंने कहा कि मौजूदा राज्यपाल एक अच्छे इंसान हैं और इनकी कार्यप्रणाली पूरी तरह अच्छी और संतोषजनक है। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था में सुधार की और अधिक जरूरत है। उत्तराखंड में राज्यपाल रहते हुए मुख्य कार्य के बारे में बताया कि उन्होंने चार धामों के विकास व चारधाम यात्रा के लिए सकारात्मक प्रयास किए हैं। इस अवसर पर हाजी राव जमशेद अरशद जमाल, राव तोहीद, अकरम, हाजी इकबाल, भूरा बाजदार, मो. इमरान, रविंद्र शर्मा, भूट्टो प्रधान आदि उपस्थित रहे।
आतंकवाद का डटकर मुकाबला करें
ठेकेदार दिलशाद के प्रतिष्ठान पर आयोजित आतंकवाद विरोधी एवं कौमी एकता सम्मेलन में पूर्व राज्यपाल ने कहा कि मुसलमानों की भारत में बड़ी आबादी है। देश में आजादी से लेकर आज तक मुसलमानों का बड़ा योगदान रहा है यहां सभी हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई भाईचारे व एकता के साथ रह रहे हैं।
आज के प्रगतिशील दौर में मुसलमानों को उर्दू व हिंदी के साथ विज्ञान, गणित आदि की शिक्षा भी लेनी होगी और बच्चों को शिक्षित करना होगा ताकि बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो। उन्होंने कहा कि आतंकवादी इंसानियत के सबसे बडे़ दुश्मन हैं और इनका पोषण करने वाले इन्हें गुमराह करते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि सभी मिल-जुलकर आतंकवादियों व आतंकवाद का डटकर विरोध करे।
कार्यक्रम में हाजी राव जमशेद, भूट्टो प्रधान, देशपाल सैनी, मो. अकरम, जसवीर चौधरी, मौलाना लियाकत, हाजी इकबाल, अहसान, रुस्तम, महराज, शफात, अफजाल, खुर्शीद हकीम, सुभाष सैनी, मनफैत अली, राव तौहीद, राव नफीस सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। पूर्व राज्यपाल का सैकड़ों लोगों ने माल्यार्पण कर स्वागत किया। कार्यक्रम उपरांत पूर्व राज्यपाल ने मदरसा खानका में पहुंचकर मौलाना नजम से मुलाकात की।