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दूसरे दिन भी दूर नहीं हुई कार्यकर्ताओं की नाराजगी

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दूसरे दिन भी दूर नहीं हुई कार्यकर्ताओं की नाराजगी
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शामली। विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद जिले की शामली और थानाभवन विधानसभा सीट पर गठबंधन प्रत्याशियों पर बागियों का खतरा मंडरा रहा है। दोनों ही विधानसभा सीटों के गांवों में कार्यकर्ता पंचायत कर प्रत्याशी का विरोध कर रहे हैैं। सपा-रालोद गठबंधन को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।
भाजपा ने कैराना विधानसभा सीट से भाजपा के पूर्व सांसद स्वर्गीय हुकुम सिंह की बेटी मृंगाका सिंह, शामली विधानसभा सीट से भाजपा विधायक तेजेंद्र निर्वाल, थानाभवन विधानसभा सीट पर विधायक व प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा को प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतारा है। गठबंधन में शामली और थानाभवन विधान सभा सीट रालोद के पास और कैराना सपा के खाते में चली गई है। थानाभवन विधानसभा सीट से योजना आयोग के सदस्य रहे प्रो. सुधीर पंवार सपा से रालोद से पूर्व विधायक अब्दुल राव वारिस टिकट मांगे रहे थे। लेकिन गठबंधन ने काफी जद्दोजहद के बाद यहां से अशरफ अली को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
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इसी प्रकार शामली विधानसभा सीट से गठबंधन से पूर्व विधायक राजेश्वर बंसल के पुत्र अखिल बंसल, पूर्व विधायक बलवीर मलिक किवाना के भतीजे बिजेंद्र मलिक और रालोद में आठ माह पूर्व शामिल हुए प्रसन्न चौधरी, कांधला क्षेत्र के विक्रांत जावला टिकट के दावेदार थे। गठबंधन ने यहां से प्रसन्न चौधरी को मौका दिया है। प्रसन्न चौधरी को टिकट दिए जाने के विरोध में पूर्व विधायक बलवीर मलिक नाराज हैं। वह भतीजे बिजेंद्र मलिक किवाना को टिकट न दिए जाने से दो दिन पूर्व किवाना गांव में पंचायत कर रालोद हाईकमान से प्रत्याशी बदलने की मांग कर चुके हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में रालोद प्रत्याशी के रूप में बिजेंद्र मलिक चुनाव लड़ चुके हैं। उन्हें 34 हजार वोट मिले थे। इस बार वह रालोद गठबंधन से टिकट की आस लगाए थे। लेकिन ऐन वक्त पर शामली विधानसभा सीट पर गठबंधन प्रत्याशी प्रसन्न चौधरी को टिकट दे दिया गया। बलवीर मलिक 2007 में बसपा से कांधला से विधायक रह चुके हैं। गठवाला खाप से होने के कारण वह अच्छा प्रभाव रखते हैं।
सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ने खरीदा निर्दलीय नामांकन पत्र
थानाभवन विधानसभा सीट पर पूर्व विधायक अब्दुल राव वारिस का ऐन वक्त पर टिकट कटने से गठबंधन प्रत्याशी अशरफ अली को नुकसान हो रहा है। थानाभवन विधानसभा से 2002 में विधायक रहे और सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष किरणपाल कश्यप भी निर्दलीय रूप से नामांकन पत्र खरीद चुके हैं। हालांकि पूर्व अब्दुल राव वारिस कह चुके हैं, कि वह पार्टी के साथ हैं। वह थानाभवन विधान सभा सीट से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। इसी प्रकार सपा की ओर टिकट के दावेदार प्रो. सुधीर पंवार ने गठबंधन के फैसले के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने गठबंधन प्रत्याशी के समर्थन में खड़े होने का दावा किया है। रालोद गठबंधन के प्रत्याशियों को बागियों से खतरा बताया जा रहा है। यदि रालोद मुखिया चौधरी जयंत सिंह सिंह बागियों का विरोध स्वर शांत नहीं कर पाए तो पार्टी को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
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नाहिद की बहन इकरा को मिल सकता है टिकट
शामली। कैराना विधानसभा सीट से सपा की ओर से गठबंधन का प्रत्याशी विधायक नाहिद हसन को बनाया था। नाहिद हसन के शनिवार को जेल चले जाने के बाद पूरे दिन कैराना विधानसभा सीट से नाहिद हसन के स्थान पर उसकी बहन इकरा हसन को टिकट दिए जाने की चर्चा चलती रही। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का एक बयान भी सामने आया है। जिसमें वह कह रहे हैं कि नाहिद को जेल भेज दिया गया है तो उनके परिवार के ऐसे सदस्य को टिकट देंगे, जिस पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं है। जिसके बाद सोशल मीडिया पर इकरा हसन के चुनाव लड़ने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। हालांकि इकरा हसन ने इन चर्चाओं का खंडन किया है। उनका कहना है कि नाहिद हसन सपा प्रत्याशी के रूप में नामांकन कर चुके हैं। विधानसभा चुनाव नाहिद हसन ही लड़ेंगे। उन्होंने समर्थकों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। गौरतलब है कि नाहिद हसन गैंगस्टर के मुकदमे में काफी दिनों से फरार चल रहे थे। ऐसे में उनकी छोटी बहन इकरा हसन ही चुनाव में प्रचार-प्रसार का जिम्मा उठाए हुए थी। अब नाहिद हसन के जेल जाने के बाद यह तय हो गया है कि उनके चुनाव की बागडोर पूरी तरह से इकरा हसन के हाथ में आ गई है।
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