शामली। नगर क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी का असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कई स्कूलों में पूरी कक्षाओं की जिम्मेदारी एक-एक शिक्षामित्र के भरोसे है। ऐसे में शिक्षक न सिर्फ पढ़ाई का जिम्मा संभाल रहे हैं, बल्कि अन्य शैक्षणिक कार्य भी करने पड़ रहे हैं। संसाधनों और शिक्षकों की कमी के बीच अभिभावकों के सामने सवाल खड़ा है कि आखिर इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे बेहतर शिक्षा हासिल कर इंजीनियर और डॉक्टर कैसे बनेंगे। शामली नगर क्षेत्र में नौ परिषदीय स्कूल संचालित हैं। इनमें से तीन स्कूल ऐसे हैं, जो एक-एक शिक्षामित्र के भरोसे पांच कक्षाएं चल रही हैं, वहीं उसी को प्रभारी प्रधानाध्यापक का कार्यभार संभालते हुए विभाग के अन्य कार्य भी करने पड़ रहे हैं।
प्राथमिक विद्यालय नंबर 7 बुढ़ाना रोड
प्राथमिक विद्यालय बुढ़ाना रोड नंबर सात में कक्षा एक से पांच तक 50 बच्चे पंजीकृत हैं। स्कूल में केवल एक शिक्षामित्र आदित्य तैनात है। वही प्रभारी प्रधानाध्यापक का कार्यभार संभाल रहा है और वही बच्चों को पढ़ाई करा रहे हैं।
प्राथमिक विद्यालय नंबर एक नंदू प्रसाद
प्राथमिक विद्यालय नंदू प्रसाद नंबर एक में 83 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय में केवल एक शिक्षामित्र अनिता की तैनाती है। वही प्रधानाध्यापिका का कार्यभार भी संभाल रहीं हैं।
प्राथमिक विद्यालय गुलशन नगर
प्राथमिक विद्यालय गुलशन नगर में कुल 65 बच्चे पंजीकृत हैं। स्कूल में एक प्रधानाध्यापक नीरज गोयल और इसके अलावा एक शिक्षामित्र नाजिया की तैनाती है। प्रधानाध्यापक अन्य कार्य व बाहरी कार्यों में भी व्यस्त रहते हैं, तो सभी बच्चों को अकेली शिक्षामित्र ही संभालती है।
कन्या उच्च प्राथमिक कंपोजिट विद्यालय नंबर दो माजरा रोड
कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय माजरा रोड स्कूल में कुल 85 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय में प्रधानाध्यापक रविकांत के अलावा एक शिक्षामित्र की तैनाती है।
-प्राथमिक विद्यालय नंबर 13 रेलपार
प्राथमिक विद्यालय नंबर 13 रेलपार में कुल 44 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय में एक शिक्षामित्र रेणुका पर प्रधानाध्यापिका का पद है और एक शिक्षामित्र संजू की तैनाती है।
कन्या जूनियर हाईस्कूल नंबर एक गुजरातियान
कन्या जूनियर हाईस्कूल में 120 बच्चे पंजीकृत हैं। इस विद्यालय में कई स्कूल मर्जर किए गए हैं। विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक दीपक शर्मा के अलावा दो शिक्षामित्रों की तैनाती है।
यह है नियम
प्राथमिक विद्यालयों में 30:1 का अनुपात निर्धारित है, यानी हर 30 बच्चों पर कम से कम 1 शिक्षक होना अनिवार्य है।
छात्र संख्या के आधार पर शिक्षकों की संख्या 0 से 60 बच्चे : 2 शिक्षक, 61 से 90 बच्चे : 3, शिक्षक 91 से 120 बच्चे : 4 शिक्षक, 121 से 150 बच्चे: 5 शिक्षक, 150 से अधिक बच्चे : 5 शिक्षक और एक प्रधानाध्यापक, 200 से अधिक बच्चे : छात्र-शिक्षक अनुपात 40 से अधिक नहीं होना चाहिए।
-उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 35:1 का अनुपात तय किया गया है, यानी प्रत्येक 35 विद्यार्थियों पर 1 शिक्षक।
-विषयवार शिक्षक नियम : विज्ञान और गणित, सामाजिक अध्ययन, और भाषा (हिंदी/अंग्रेजी) पढ़ाने के लिए अलग-अलग शिक्षकों का प्रावधान है।
-कम से कम 1 शिक्षक प्रति 35 बच्चों के हिसाब से होने चाहिए और कुल छात्र संख्या 100 से अधिक होने पर पूर्णकालिक प्रधानाध्यापक की तैनाती का नियम है।
काफी समय पहले ग्रामीण क्षेत्र और शहरी क्षेत्र के तबादला नीति में बदलाव हुआ था। जिसके बाद से केवल ग्रामीण क्षेत्रों में और नगर (शहरी) सेवा संवर्ग के शिक्षक का फेरबदल केवल नगर क्षेत्र के विद्यालयों में ही किया जाता है। जिस कारण नगर क्षेत्र में समस्या बनी हुई है। नियमों में बदलाव होते ही सुधार की उम्मीद है। - संतोष कुमार, बीएसए