फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shamli News: बदहाल गोशालाओं में गोवंश बेहाल... जिम्मेदार हैं माैन, फिर सुनेगा काैन

विज्ञापन
विज्ञापन
शामली। सरकार गोशालाओं में व्यवस्थाओं का दम भरते हैं लेकिन हकीकत में गोशालाओं का बुरा हाल हैं। जनपद में 27 गोशाला संचालित हैं। इनमें 4 वृहद गोशाला और 23 अस्थाई गोशाला संचालित हैं। सभी गोशालाओं में 2825 पशु पंजीकृत है। सरकार की ओर से गोशाला में प्रति पशु 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भरण पोषण भत्ता मिलता है। इस हिसाब से प्रति गोशाला प्रतिदिन एक लाख 41 हजार 250 रुपये खर्च होता है, लेकिन अधिकांश गोशालाओं में धूप से बचने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है। चिलचिलाती धूप में गोवंश रहने को मजबूर है। कई बीमार हैं। हरे चारे की बजाय सूखा भूसा दिया जा रहा है। जिम्मेदार बेखबर हैं। बुधवार को जनपद की गोशालाओं की पड़ताल की तो बेहद खराब हालत मिली।
विज्ञापन

गांव झाल गोशाला
इस गोशाला में गोवंश के लिए छाया की उचित व्यवस्था नहीं थी। कुछ गोवंश धूप में खड़े मिले। हौज में पर्याप्त पानी नहीं था। साफ-सफाई भी ठीक नहीं थी। गोवंशों को हरा चारा नहीं दिया गया था। एक गोवंश बीमार था और हालत बहुत खराब थी। धूप से बचाव के लिए उसके आसपास ईंटें लगा रखी थी। तीन कर्मचारियों में से एक कर्मचारी संदीप गोशाला के बाहर मिला। बताया गया कि यहां पर 100 गोवंश रहते हैं।
कुड़ाना रोड स्थित गोशाला
यह गोशाला जिला पंचायत की ओर से संचालित की जा रही है। गोशाला में छाया की तो पर्याप्त सुविधा है, लेकिन गोवंशों को हरा चारा नहीं दिया गया। गोशाला में मिले केयरटेकर आकाश ने बताया कि गोशाला में 55 पशु पंजीकृत हैं। उसने बताया कि यहां बिजली की समस्या है। सुबह पांच से 10 बजे तक ही बिजली आती है, जिस कारण सभी पशुओं को नहलाने और पानी पिलाने में परेशानी होती है।
विज्ञापन

कस्बा बनत गोशाला
यह जनपद की सबसे बड़ी गोशाला हैं। गोशाला में करीब 350 गोवंश हैं। कईं गोवंश बीमार हालत में पशुओं के बीच लेटे थे। पानी की व्यवस्था ठीक थी लेकिन हरे चारे की व्यवस्था नहीं थी। कर्मचारी प्रवेंद्र ने बताया कि हरा चारा अभी नहीं मिल रहा है। हरा चारा मक्का की तलाश की जा रही है।
जलालाबाद गोशाला
गोशाला में 87 गोवंश हैं। छाया के लिए तीन टीन शेड बने हुए थे। हरे चारे की व्यवस्था नहीं मिलीं। गोवंशों को सूखा भूसा डाला गया था। भूसा खपरैल में ऐसे ही पड़ा हुआ मिला। हरा चारा न होने से अधिकतर पशु खपरैल से अलग खड़े थे।
गांव नाला गोशाला
गांव नाला में स्थित गोशाला में 75 गोवंश है। दो टीन शेड मिले, पानी की उचित व्यवस्था नहीं पाई गई। हरा चारा नहीं दिया गया। गर्मी से बचाव के पर्याप्त साधन नहीं मिले। आगे गर्मी में गोवंश के लिए समस्या बन सकती है।
कैसे खिलाए हरा चारा, चारे पर महंगाई की मार

कुड़ाना रोड स्थित गोशाला पर मिले केयरटेकर आकाश ने बताया कि हरा चारा काफी महंगा है। जईं का भाव 450 रुपये प्रति क्विंटल है, इतनी महंगाई के चलते पशुओं को कैसे हरा चारा खिलाएं। पहले अगोले मिल रहे थे, लेकिन अब अगोले नहीं आ रहे हैं। सरकार से मिलने वाली रकम में चोकर व भूसा सभी खर्च शामिल है। ज्वार बुआई के बाद ही हरा चारा मिलने की उम्मीद है।
वर्जन
सभी गोशालाओं में गोवंशों को देखने के लिए डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। समय पर गोवंशों को उपचार दिया जा रहा है। यदि फिर भी किसी गोशाला में पशु अधिक बीमार है तो संचालक डॉक्टरों को इमरजेंसी में भी बुला सकते है। -चंद्रभानू कश्यप, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी शामली।
-पहले भी कुछ गोशालाओं में लापरवाही मिली थी, जिनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी। जल्द ही गोशालाओं का निरीक्षण किया जाएगा। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।- विनय कुमार तिवारी, सीडीओ।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें