शामली। उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन पर बजट की अनुमति न होने से निर्माण कार्य अधर में लटक गया है। नई सरकार के गठन के बाद कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के बाद निर्माण एजेंसी कार्य कराएगी।
सात साल पूर्व उत्तर प्रदेश शासन ने 207 किमी लंबाई वाले दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन का निर्माण कराने की स्वीकृति दी थी। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए हैदराबाद की प्राइवेट कंपनी एसईडब्लू को जिम्मेदारी सौंपी थी। प्रोजेक्ट में शामली, सहारनपुर में बाईपास, मनानी, रामपुर मनिहारन, नानौता-थानाभवन, बलवा-शामली, बड़ौत-बागपत एवं लोनी में रेलवे ब्रिज को प्रोजेक्ट में शामिल किया गया था। मायावती सरकार में पेड़ों की अनुमति न आने से कार्य अधर में लटक गया था।
अखिलेश सरकार बनी तो फोरलेन की प्रक्रिया शुरू हुई तो निर्माण एजेंसी अपना कार्य अधूरा छोड़कर भाग गई। राजमार्ग प्राधिकरण ने निर्माण एजेंसी को 2015 में टेंडर समाप्त करने का कारण बताओ नोटिस जारी किया था। छह माह समाप्त होने के बाद निर्माण एजेंसी एसईडब्लू द्वारा कोई जवाब नहीं दिया। उत्तर प्रदेश राज राज्य मार्ग प्राधिकरण ने 16 जुलाई 2016 को टेंडर समाप्त करने की प्रक्रिया पूरी करते हुए उत्तर प्रदेश शासन को अपनी रिपोर्ट भेज दी थी।
उत्तर प्रदेश शासन ने आगरा-लखनऊ हाईवे की तर्ज पर दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन को बनाने का प्रारूप तैयार करते हुए 15 दिसंबर को टेंडर छोड़ने की तिथि घोषित की थी। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी नवनीत सहगल के सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद निर्माण एजेंसी के टेंडर छोड़ने की तिथि चार जनवरी बढ़ा दी गई थी। प्राधिकरण गाजियाबाद के महाप्रबंधक शिव कुमार अवधिया ने बताया कि दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन की बजट की स्वीकृति मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की बैठक में होनी थी। इस बार कैबिनेट की बैठक में दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन के प्रोजेक्ट के बजट की स्वीकृति नहीं हो पाई है।
जिससे टेंडर छोड़ने की तिथि चार जनवरी के स्थान पर बीस जनवरी कर दी गई है। इसी सप्ताह विधान सभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने की संभावना है। अब इसके बजट की स्वीकृति नई सरकार के गठन के बाद ही हो सकेगी।