शामली। शामली रोडवेज डिपो एवं कार्यशाला की भूमि का बैनामा न होने के बाद रोडवेज के अफसरों ने जिला प्रशासन से 47 लाख रुपये की धनराशि वापस मांगने की कवायद शुरू कर दी है।
अफसरों ने इस संबंध में रोडवेज के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर धनराशि मांगने की संस्तुति कर दी है। प्रबंध निदेशक का आदेश आते ही शामली जिला प्रशासन से धनराशि मांगने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
उत्तर प्रदेश शासन ने कई वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम का शामली रोडवेज डिपो स्वीकृति किया था। 35 साल से डिपो के लिए भूमि उपलब्ध न होने से यह योजना अधर में लटका हुई थी।
दो साल पूर्व शामली के तत्कालीन डीएम ओपी वर्मा ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम को शामली- मुजफ्फरनगर मार्ग पर फतेहपुर में ग्राम समाज की नौ बीघा भूमि को रोडवेज डिपो और कार्यशाला को लीज पर देते हुए 47 लाख रुपये की धनराशि इलाहाबाद बैंक के माध्यम से जिला कोषागार में हस्तांतरित करा ली थी।
जिला प्रशासन ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन के अफसरों को ग्राम पंचायत की भूमि पर कब्जा करा दिया था। परिवहन निगम ने 9 बीघा भूमि की सीमेंट के खंभे लगाकर बैरिकेडिंग कर दी थी।
सहारनपुुुर परिक्षेत्र के आरएम की ओर से शासन के निर्देश पर रोडवेज डिपो एवं कार्यालय की भूमि के लिए बैनामा कराने लिए शामली डीएम को कई बार पत्र लिखकर अनुरोध किया गया। तत्कालीन डीएम सुजीत कुमार ने मामले की जांच एडीएम को देकर जिला शासकीय अधिवक्ता से रिपोर्ट मांगी।
मौजूदा डीएम इंद्र विक्रम सिंह के समक्ष जिला व्यापार बंधु की बैठकों में व्यापारी नेता घनश्याम दास गर्ग द्वारा यह मामला उठाया गया। डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने यह तर्क दिया कि सरकारी भूमि का दूसरे सरकारी विभाग को बैनामा कराने का नियम नहीं है। मगर भूमि का लीज पर देने का नियम है।
सहारनपुर परिक्षेत्र के आरएम मनोज पुंडीर ने बताया कि रोडवेज डिपो की भूमि का जिला प्रशासन द्वारा बैनामा नहीं किया जा रहा है। वर्ष 2015 से बैनामे को लेकर विवाद चल रहा है।
वहीं, इसके अलावा डिपो एवं कार्यालय की भूमि का प्रशासन द्वारा बैनामा न किए जाने के बाद 47 लाख रुपये की धनराशि मांगने की संस्तुति करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम लखनऊ के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखा गया है। प्रबंध निदेशक का आदेश आते ही शामली जिला प्रशासन से धनराशि मांगने की कार्रवाई की जाएगी।