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Shamli News: बूंदाबांदी से तापमान में गिरावट, फसलों को नुकसान

Wed, 05 Feb 2025 12:31 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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शामली। जिले में छिट-पुट वर्षा एवं तापमान में गिरावट के साथ रबी की फसल गेहूं, सरसो, आलू, गन्ना और आम में बीमारियां बढ़ने की संभावना है।
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जिला कृषि रक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि गेहूं में पीली गेरूई को नियंत्रण करने के लिए प्रोपीकोनाजोल 25 प्रति ईसी 500 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। पत्ती धब्बा रोग के नियंत्रण के लिए थायोफिनेट मिथाइल 70 प्रति डब्लूपी 700 ग्राम अथवा मेन्कोजेब 75 प्रति डब्लूपी 2.0 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
सरसों राई बालदार सूंडी में 10-15 प्रति प्रकोपित पत्तियां दिखाई देने पर आर्थिक क्षति स्तर मानते हुए मैलाथियान 50 प्रति ईसी की 1.5 लीटर अथवा क्यूनालफास 25 प्रति ईसी की 1.25 लीटर मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। सफेद गेरूई रोग के नियंत्रण के लिए मैन्कोजेब 75 प्रति डब्लूपी अथवा जिनेब 75 प्रति की 2.0 किग्रा मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
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आलू में पछेती झुलसा इस रोग से बचने के लिए तत्काल सिंचाई बंद कर देनी चाहिए। मैन्कोजेब 75 प्रति डब्लूपी अथवा जिनेब 75 प्रति डब्लूपी 1.5-2.0 किग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। गन्ना में टॉप बोरर कीट के प्रकोप की स्थिति में ट्राइकोग्रामा किलोनिस के 50 हजार से 60 हजार अंडे प्रति हेक्टेयर की दर से 3 बार प्रयोग करना चाहिए।
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आम की फसल में मिली बगकीट के शिशु तथा प्रौढ़ दोनों ही बौर एवं फलों के बृन्त से रस चूस लेते हैं। इससे भारी नुकसान होता है। यदि मिलीबग उपर तक चढ़ गए हों तो क्यूनालफास 25 प्रति ईसी 2.0 मिली अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रति एसएल 2-4 मिली प्रति पेड़ 10 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
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