शामली। कोरोना काल में शिक्षा और शिक्षण कार्य में बदलाव आया है। विद्यालय बंद रहने के कारण ऑनलाइन शिक्षण कार्य किया गया। ऑनलाइन शिक्षण कार्य में जिले के कई शिक्षकों ने सेेवा और समर्पण भाव के साथ उत्कृष्ट कार्य कर शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करते हुए जिले का नाम प्रदेश स्तर पर रोशन किया है। कोरोना काल में शिक्षण कार्य को लेकर शिक्षकों से बातचीत की गई।
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सुबह छह बजे, रात आठ बजे चलाई ऑनलाइन कक्षा
आदर्श प्राथमिक विद्यालय नंबर-एक की प्रधानाध्यापिका राज्य अध्यापक पुरस्कार-2018 प्राप्त सुवासिनी को हाल ही में दो सितंबर को गोरखपुर में आयोजित समारोह में राज्य स्तरीय एडूलीडर यूपी-2021 पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सुवासिनी ने बताया कि कोरोना काल में ऑनलाइन कक्षा से ज्यादातर बच्चे जोड़कर शिक्षण कार्य कराया गया। जिन बच्चों के अभिभावक मोबाइल लेकर सुबह काम पर निकल जाते थे और शाम को देर से लौटते थे, ऐसे बच्चों को सुबह छह बजे और रात में आठ बजे लिंक भेजकर ऑनलाइन कक्षा से जोड़ा गया। 2014 में पायलट प्रोजेक्ट के तहत अंग्रेजी माध्यम में विद्यालय चयनित हुआ था। पिछले छह साल से लगातार नवोदय विद्यालय में उनके विद्यालय के बच्चों को सफलता मिली है। प्रदेश स्तरीय विद्या ज्ञान की प्रारंभिक परीक्षा को बच्चे पास कर चुके हैं। विद्यालय का कायाकल्प करने में सरकारी सहयोग के साथ निजी स्तर पर प्रयास किए गए।
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ड्राप बॉक्स बनाकर छात्राओं केे शिक्षा से जोड़ा
श्री जैन कन्या इंटर कालेज शामली की प्रधानाचार्या डॉ. रुचिता ढाका ने बताया कि कोरोना काल में ऑनलाइन क्लास में 85 प्रतिशत छात्राएं जुड़ी रहीं। इसके लिए बच्चों से व्यक्तिगत प्रयास किए गए। जिन छात्राओं के पास स्मार्ट फोन नहीं है, उनके लिए कालेज में ड्राप बॉक्स बनाया गया। बच्चे शिक्षण कार्य संबंधी समस्या बॉक्स में डालते थे और फिर संबंधित शिक्षक उसमें होमवर्क देते थे और पूर्व में कराए गए शिक्षण कार्य को चेक करते थे। इस तरह से शिक्षण कार्य कराने से सभी छात्राओं को लाभ मिला। छात्राओं ने कालेज में मास्क और हर्बल सैनिटाइजर बनाया गया। शिक्षकों की मेहनत का परिणाम रहा कि हाईस्कूल के रिजल्ट में सभी छात्राएं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुई।
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मोहल्ला क्लास चलाई, ऑनलाइन प्रतियोगिता कराई
राज्य अध्यापक पुरस्कार-2019 प्राप्त उच्च प्राथमिक विद्यालय लिलौन की प्रभारी प्रधानाध्यापिका उपमा शर्मा ने कोरोना काल में ऑनलाइन क्लास के साथ विभिन्न प्रतियोगिताएं कराई। उन्होंने जिले में सबसे पहले बेसिक शिक्षा में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की। कोरोना काल में डिजिटल समाचार पत्र उड़ान और डिजिटल पत्रिका निकाली गई, जिसमें बच्चों द्वारा की गई गतिविधियों को और अभिभावकों के सहयोग को बताया गया। ऑनलाइन समर कैंप में बच्चों को चित्रकला, निबंध और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं कराई। शिक्षण के दौरान बच्चों को मास्क बनाना सिखाया। बच्चों ने ऑनलाइन माध्यम से वीडियो बनाकर कोरोना जागरूकता का संदेश दिया। घर-घर जाकर मोहल्ला क्लास चलाई और कार्य पत्रक द्वारा बच्चों को घर पर कार्य भी दिया। इन प्रयासों का परिणाम ये रहा कि जो बच्चे ऑनलाइन माध्यम से नहीं जुड़ पाए थे, वे भी शिक्षा से जुड़े रहे।
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ड्रापआउट बच्चों को किया चिह्नित, मोहल्ला पाठशाला चलाई
कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय डांगरोल के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार को हाल ही में दो सितंबर को गोरखपुर में एडूलीडर्स यूपी सम्मान-2021 से पुरस्कृत किया गया। इससे पहले उन्हें विश्व पर्यावरण दिवस पर पांच जून 2020 को रेड टेप मूवमेंट के अंतर्गत राष्ट्रीय पुरस्कार, 2019 में अरविंदो सोसायटी द्वारा आयोजित इनोवेटिव पाठशाला में पुरस्कार, 2020 में रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन द्वारा नेशनल बिल्डर पुरस्कार मिल चुके हैं। सामूहिक सहभागिता और ग्राम प्रधान के सहयोग से विद्यालय का कायाकल्प कराया। ड्रापआउट बच्चों को चिह्नित कर अभिभावकों से संपर्क कर नामांकित किया। पांच साल से लगातार नामांकित बच्चों की संख्या बढ़ी है। कोरोना काल में व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर शिक्षण कार्य कराया। कमजोर गरीब बच्चों के लिए मोहल्ला पाठशाला का गांव में अलग-अलग स्थानों पर आयोजन कर शिक्षण कार्य कराया गया।