शामली। शासन कहता है कि स्कूल चलो अभियान चलाओ, शत प्रतिशत बच्चों का दाखिला कराओ। मगर, ऐसे विद्यालय में बच्चों का दाखिला कराकर क्या किया जाए, जहां कोई शिक्षक ही तैनात नहीं होता। ऐसे में सर्व शिक्षा अभियान आखिर कैसे कामयाब होगा। कुछ ऐसा ही हाल है गांव मंगलपुर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय का, जहां दो महीने से कोई शिक्षक तैनात नहीं है। बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण विद्यालय में पंजीकृत 90 बच्चों का भविष्य ही संकट में फंस गया है। है।
गांव बीवीपुर हटिया का मजरा मंगलपुर की आबादी करीब 2500 है। गांव में एक प्राइमरी विद्यालय और एक उच्च प्राथमिक विद्यालय है। उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा छह से कक्षा आठ तक के 90 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इस विद्यालय पर दो महीने से ताला लटका हुआ है। कोई भी शिक्षक यहां तैनात नहीं है। सबसे हैरत की बात यह है कि परीक्षा हो चुकी है, लेकिन आज तक परिणाम घोषित नहीं हुआ है।
विद्यालय परिसर में गांव वाले उपले पाथने लगे हैं। स्कूल की चारदीवारी भी नहीं है। ग्रामीणों ने इस बारे में कई बार शिकायत कर ली, लेकिन अफसरों को बच्चों के भविष्य की कतई चिंता नहीं है। अमर उजाला टीम ने बृहस्पतिवार को स्कूल पहुंची, तो वहां अलग ही नजारा देखने को मिला। स्कूल के दरवाजे पर ताला बंद था, तो चारों तरफ गंदगी फैली थी।
बच्चे घूमकर चले जाते हैं घर
ग्रामीण राम मेहर ने बताया कि दो माह से स्कूल में शिक्षक नहीं आने की वजह से स्कूल बंद पड़ा है। बच्चे इधर उधर घूमकर अपना समय व्यतीत करते है। बिजेंद्र सिंह ने बताया कि उनके गांव के पास स्थित गांव भूरा और जंधेड़ी में स्कूल तो है, लेकिन कोई यातायात सुविधा नहीं होने के कारण बच्चे वहां नहीं जाते हैं। परविंदर कुमार ने बताया कि 12 साल पूर्व बने इस स्कूल की बिल्डिंग में जगह जगह दरारें हो रही हैं। गुलाब सिंह ने बताया कि स्कूल बंद होने से गरीब आदमी परेशान। क्योंकि प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने के लिए पैसे नहीं है। हरपाल सिंह ने बताया कि स्कूल बंद होने की कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं।
नए शिक्षक भेजे बगैर ही कर दिया स्थानांतरण
ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल में एक शिक्षा मित्र की तैनाती थी, जबकि चार माह पूर्व ही दो शिक्षक मेरठ से स्थानांतरित होकर इस स्कूल में आए थे। उन्होंने परीक्षा कराने के बाद स्कूल में आना बंद कर दिया। बाद में पता चला कि दोनों शिक्षकों ने मेरठ क्षेत्र में स्थानांतरण करा लिया है। इसके चलते स्कूल के बच्चों का परीक्षाफल भी घोषित नहीं हो सका।
टीसी कटवाने के लिए प्रधान के घर काट रहे चक्कर
स्कूल में कक्षा आठ की पढ़ाई पूर्ण करने वाले छात्र छात्राओं को कक्षा नौ में दाखिला लेने के लिए टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) भी नहीं मिल पा रही है। इसके लिए अभिभावक बार बार ग्राम प्रधान के घर चक्कर काट रहे है।
ग्राम प्रधान तहसील दिवस में कर चुके शिकायत
ग्राम प्रधान इनाम ने बताया कि बेसिक शिक्षा अधिकारी से कई बार तहसील दिवस में मुलाकात कर शिकायत कर चुके है। हर बार बीएसए जल्दी ही शिक्षक की तैनाती का आश्वासन देकर टाल देते हैं। गत तीन मई को भी कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी को शिकायत पत्र देकर शिक्षकों की तैनाती की मांग की थी। अभी तक स्कूल में कोई शिक्षक नहीं पहुंच सका है।
जनपद में 56 सरकारी स्कूलों की भी हालत खराब --
शामली। जनपद में शामली ब्लॉक को छोड़कर अन्य तीन ब्लाक के 56 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों की हालत खस्ता चल रही है। 46 स्कूल ऐसे है, जिनमें एक एक शिक्षक के भरोसे ही शिक्षण कार्य चल रहा है। वहीं, 10 स्कूल ऐसे हैं, जो बंद की स्थिति में है। इनमें कोई भी शिक्षक तैनात नहीं है। अन्य स्कूल से शिक्षक भेजकर उनमें पढ़ाई कराई जा रही है। ताज्जुब तो यह है कि कुछ स्कूलों में बच्चों के पंजीकरण के हिसाब से मानक से अधिक शिक्षक तैनात है। सरकारी स्कूल में 30 बच्चों पर एक शिक्षक की तैनाती का नियम है, जबकि कई स्कूल ऐसे हैं जहां पर पांच शिक्षकों की तैनाती की जगह आठ से 10 शिक्षक तैनात हैं।
मैं अभी किसी जरूरी कार्य से लखनऊ गया हूं। मंगलपुर गांव स्थित स्कूल में शिक्षक तैनात नहीं होने के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। लखनऊ से लौटते ही इसकी जानकारी कराऊंगा और यदि शिक्षक तैनात नहीं है, तो शीघ्र तैनाती करा दी जाएगी। - चंद्रशेखर, बीएसए।