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तालीम ही मनुष्य को फर्श से अर्श तक पहुंचाती है : मौलाना आकिल 

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file - फोटो : amarujala
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अशरफुल उलूम गंगोह के उस्ताद हदीस एवं बुजुर्ग आलिम-ए-दीन हजरत मौलाना सलमान ने कहा कि दीनी मदरसे इस्लाम के मजबूत किले हैं, जहां से छात्र इंसानियत का सबक पढ़कर पूरी दुनिया में अमन का पैगाम दे रहे हैं। उन्होंने अपनी नस्लों को दीनी तालीम दिलाने पर जोर दिया।
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सोमवार को क्षेत्र के पानीपत रोड पर स्थित काकौर गांव में मदरसा दारूल उलूम हबीबिया की संग-ए-बुनियाद के मौके पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। शुभारंभ जामिअतुल बनात के मोहतमिम कारी मंजूरूल हसन की तिलावत-ए-कलाम पाक से हुआ। कारी फुरकान ने नात पेश की। मुख्य अतिथि हजरत मौलाना सलमान ने कहा कि इस्लाम ने हमेशा भाईचारे का पैगाम दिया और दूसरों के मदद करने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि समाज को शिक्षित करने के लिए मदरसों की स्थापना की जा रही है। मदरसों में कुरान व हदीस के साथ ही इंसानियत की तालीम भी दी जाती है। कुरान की आयत ‘इकरा’ है, जिसकी परिभाषा है ‘पढ़ो’। दोनों जहान की कामयाबी दीनी तालीम से ही मिलती है। 
जमीयत उलमा-ए-हिंद के पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मौलाना आकिल ने कहा कि तालीम ही मनुष्य को फर्श से अर्श तक पहुंचाती है। अशिक्षित व्यक्ति जीवनभर भटकता रहता है। शिक्षा कामयाबी की कुंजी है। उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों को भी दूर करने का आह्वान किया। मौलाना आकिल द्वारा मदरसा दरूल उलूम हबीबिया की नींव रखी गई। इनके अलावा मौलाना कारी तालिब, मौलाना रियाज ने भी संबोधन किया। कार्यक्रम का समापन मौलाना सलमान की विशेष दुआओं पर हुआ। संचालन मौलाना मुस्तफा काकौर मोहतमिम मदरसा फैजुल उलूम द्वारा किया गया। अंत में मदरसा संस्थापक मुफ्ती यामीन ने सभी को धन्यवाद दिया। इस अवसर पर मौलाना आबिद, मौलाना इंतजार, कारी रिजवान, कारी उस्मान, कारी तालिब, जाहिद प्रधान आदि मौजूद रहे।
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