जलालाबाद। पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। पारंपरिक गेहूं, गन्ना की खेती के साथ अब किसान नकदी फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में क्षेत्र में स्वीट कॉर्न (मीठी मक्का) की खेती का क्रेज तेजी से बढ़ा है।
इस साल स्वीट कॉर्न के रकबे में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जलालाबाद क्षेत्र में इस समय करीब 1000 बीघा में इसकी खेती की जा रही है, जबकि पहले यह आंकड़ा लगभग 700 बीघा था।
साधारण मक्का जहां करीब 2000 रुपये प्रति क्विंटल बिकती है, वहीं स्वीट कॉर्न होटल, रेस्टोरेंट और मॉल में सप्लाई होने के कारण आठ से 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक दाम दिला रहा है। वर्तमान में मंडी में इसका भाव 15 से 22 रुपये प्रति किलो है, जबकि खुदरा बाजार में यह 40 से 60 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।
कम समय, ज्यादा मुनाफा
कृषि अधिकारी प्रदीप यादव के अनुसार स्वीट कॉर्न की फसल महज 75 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है। कम समय, कम पानी और बेहतर दाम मिलने के कारण किसान इसे मुख्य नकदी फसल के रूप में अपना रहे हैं। बेहतर मुनाफे को देखते हुए कई किसान कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के जरिए बड़ी कंपनियों से भी जुड़ रहे हैं।
किसानों की जुबानी
किसान बबलू सैनी का कहना है कि इसमें दोहरा फायदा मिलता है। भुट्टे बेचने के बाद बचा हरा हिस्सा पशुओं के लिए चारे के रूप में इस्तेमाल होता है, जिससे दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है।
किसान फैसल चौधरी ने बताया कि उन्होंने 100 बीघा में स्वीट कॉर्न की फसल लगा रखी है और अच्छे मुनाफे की उम्मीद है। बढ़ती मांग के चलते व्यापारी सीधे खेतों से ही खरीद कर रहे हैं, जिससे परिवहन खर्च भी बच रहा है।
गांव पुन्हैरा निवासी रामसेवक का कहना है कि इस फसल को किसी भी मौसम में उगाया जा सकता है, जिससे नुकसान की आशंका कम रहती है। वहीं पिपहरा निवासी पंचम सिंह के अनुसार पारंपरिक फसलों की तुलना में इसमें अधिक बचत हो रही है।
हर प्लेट में बढ़ रही मांग
स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न का उपयोग सलाद, सूप, पिज्जा और अचार समेत कई व्यंजनों में होता है। पौष्टिक होने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार मिल रहा है।