छह दिनों से भीषण गर्मी के चलते पिछले साल का रिकार्ड टूट गए हैं। शुक्रवार को पारा 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शुक्रवार सबसे गरम दिन रिकार्ड दर्ज किया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार सोमवार तक भीषण गर्मी और लू का कहर जारी रहेगा। वहीं, चिकित्सकों ने सलाह दी है कि दोपहर 12 बजे से लेकर शाम पांच बजे तक लोग अपने घर से बाहर न निकलें।
छह दिन से गर्मी और लू का कहर बढ़ रहा है। दिन निकलते ही आसमान से आग बरसानी शुरू हो जाती है। दोपहर होते ही गर्मी और लू के थपेड़ों से लोगों का हाल बेहाल हो जाता है। पिछले छह दिन में भीषण गर्मी और लू चलने दिन का पारा सात डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम पारा चार डिग्री तापमान बढ़ा है। दिन और रात के तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी होने से शुक्रवार को दिन पारा 44 डिग्री और रात का 27 डिग्री सेल्सियस तक रिकार्ड किया गया। शुक्रवार इस साल का सबसे गरम दिन दर्ज किया गया। पिछले सालों का रिकार्ड उठाकर देखे तो जिले में गर्मी के मौसम में अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तक औसतन रहा है। 43- 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर अधिकतम तापमान नहीं पहुंचा है। इस साल भीषण गर्मी लू चलने से आने वाले चार दिनों 45 डिग्री पहुंचने की संभावना है। कृषि विज्ञान केंद्र बघरा-जानसठ के निदेशक डॉक्टर पीके सिंह ने बताया कि तापमान बढ़ना और लू चलना अच्छे मानसून का सूचक है। 29 जून को मानसून पश्चिमी उत्तर प्रदेेश में प्रवेश कर जाएगा। 96 प्रतिशत मानसूनी बारिश होने की संभावना है। ज्यादा तापमान बढ़ने से सब्जियों को ज्यादा पानी की जरूरत है। लू और गर्मी होने से गहरी जुताई के कीट मर जाएंगे। इसके अलावा उन्होंने बताया कि गर्मी भी नौ दिन और रहेगी। छह दिन बीत चुके हैं, सिर्फ तीन दिन शेष है। ज्यादा तापमान बढ़ना वायुमंडल का प्रदूषण का मुख्य कारण है।
गर्म हवाएं और लू बचाव कैसे करें
पर्याप्त मात्रा में पानी तरल पदार्थ छाछ, नींबू का पानी, आम का उपयोग करें।
हल्के रंग के सूती एवं ढीली कपड़े पहनें और सिर को ढके, कड़ी धूूप से बचें।
लू से प्रभावित व्यक्ति को छाया में लिटाकर सूती गीले कपड़े से पौछे अथवा नहलाएं, चिकित्सक से संपर्क करें।
लू लगने के लक्षणों को पहचाने, यदि कमजोरी लगे, सिर दर्द हो, उल्टी, महसूूस हो, तेज पसीना, और झटका जैसा महसूूस हो, चक्कर आए, तो तुरंत डाक्टर से मिले।
बीमार और गर्भवती महिला कामगारों को अतिरिक्त सावधानी बरतें।
संतुलित हल्का नियमित भोजन करें, अधिक प्रोटीन वाले बासी खाद पदार्थ खाने बचे। जानवरों, छाया में बांधे और उन्हें पानी पिलाए।