शामली। नोटबंदी के आदेश के बाद जिले के कोल्हुओं, क्रेशरों पर किसान सप्ताह, पखवाड़े के उधार में अपना गन्ना देने को मजबूर हैं। गुड़-शक्कर के भाव में गिरावट आने से कोल्हू संचालकों के लिए गुड़ खांडसारी उद्योग घाटे का सौदा साबित होने लगा है।
एक जमाना था कि चीनी मिलों की संख्या कम होने से कोल्हू, क्रेशरों का गुड़, शक्कर हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र तक बिक्री के लिए जाता था। दो दशकों से वेस्ट यूपी में चीनी मिलों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने से गुड़ खंडसारी उद्योग पिछड़ता गया। जिले में 250 -300 कोल्हू- क्रेशरों की इकाई काम कर रही हैं।
पिछले दो माह से कोल्हू-क्रेशरों पर गन्ने की पेराई चल रही है। किसान अपने गेहूं की बुवाई के लिए गन्ने को औने पौने दामों में कोल्हू क्रेशरों पर डाल रह रहा है। कोल्हू संचालक पहले एक या दो दिन के उधारी में गन्ना खरीद रहे थे। आठ नवंबर को हुई नोटबंदी के बाद गुड़ खंडसारी के दामों में 200 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है।
शामली क्षेत्र के ग्राम बधेव में कोल्हू संचालक ओमपाल सिंह ने बताया कि वह 250 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना किसानों से एक या दो दिन के उधारी पर खरीद रहे हैं।
नोटबंदी होने से 15 दिन की उधारी पर गन्ना 250 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जा रहा है। इससे गुड़ शक्कर के दाम में भी 200 रुपये की गिरावट आई है। कोल्हू संचालक कुंवरपाल का कहना है कि यदि नोट बंदी से बैंकों में यही हाल रहा तो अगले 15 दिनों में 50 प्रतिशत कोल्हू बंद हो जाएंगे। शामली मंडी आढ़ती राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि 15 दिन पूर्व मंडी में गुड़ 2900 रुपये और शक्कर 3150 रुपये क्विंटल थी। अब 2750 रुपये गुड़ और 2900 रुपये शक्कर बिक रहा है।