शामली। एक के बाद एक जिले की चीनी मिलों में गन्ना पेराई सत्र समाप्त होता जा रहा है। पहले थानाभवन चीनी मिल बंद हुई और अब ऊन शुगर मिल में पेराई समाप्त हो गई, बावजूद इसके चीनी मिलों द्वारा किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिले की तीनों चीनी मिलों पर 360 करोड़
रुपये गन्ना मूल्य भुगतान हो गया है। समय पर भुगतान नहीं मिलने के कारण किसानों के सामने परेशानी पैदा हो रही हैं।
बृहस्पतिवार को ऊन शुगर मिल में गन्ना पेराई समाप्त हो गई, जबकि अप्रैल माह में थानाभवन शुगर मिल में पेराई बंद हो चुकी है। ऊन शुगर मिल पर करीब 60 करोड़ रुपये बकाया हैं, जबकि थानाभवन शुगर मिल पर 173 करोड़ रुपये बकाया है। वहीं, अपर दोआब शुगर मिल शामली में अभी गन्ना पेराई चल रही है, लेकिन इस शुगर मिल पर भी 127 करोड़ रुपये बकाया है। इस लिहाज से तीनों शुगर मिलों पर किसानों का 360 करोड़ रुपये से ज्यादा गन्ना मूल्य भुगतान बकाया हो गया है।
स्कूल-कॉलेजों में दाखिले का समय चल रहा है, लेकिन गन्ना मूल्य भुगतान मिलने में देरी होने के कारण किसान अपने बच्चों की फीस भी जमा नहीं करा पा रहे हैं। किसी का मकान निर्माण अधर में लटक गया है, तो कोई बच्चों की शादी के लिए पैसा न होने से चिंता में डूबा हुआ है। ऊन शुगर मिल के महाप्रबंधक अनिल अहलावत का कहना है कि गन्ना मूल्य भुगतान के संबंध में शासन के निर्देशों का पालन करते हुए जल्दी ही भुगतान कराया जाएगा।
किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान के लिए चीनी मिल प्रबंधन से लगातार संपर्क बनाया हुआ है। साथ ही शासन के निर्देश पर 14 दिन के निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त वार्षिक ब्याज के संबंध में भी ब्यौरा तैयार कर लिया गया है, जिन चीनी मिलों द्वारा गन्ना खरीद के 14 दिन के भीतर भुगतान नहीं किया जाएगा, उनसे 15 प्रतिशत ब्याज भी वसूला जाएगा - अनिल कुमार भारती, जिला गन्ना अधिकारी।
पाई-पाई के िलए तरस रहे िकसान
रामबीर का कहना है कि उसका लगभग तीन लाख 70 हजार रुपये गन्ना मूल्य भुगतान बनता है, जिसमें से सिर्फ एक लाख 50 हजार रुपये बकाया है। उसके बेटे की स्कूल की फीस जमा नहीं हो पाई है तथा अगली फसल को तैयार करने के लिये खाद और बीज खरीदने की समस्या सामने है। कपिल पिण्डोरा का कहना है कि चीनी मिल ने करीब तीन लाख रुपये के भुगतान में से दो लाख रुपये का भुगतान किया, एक लाख रुपये बकाया है।
रवि सिरोही निवासी ढिंढाली का कहना है कि ऊन शुगर मिल पर करीब 1800 क्विंटल गन्ना डाला, जिसका पांच लाख रुपये भुगतान बनता है। अभी तक केवल 50 प्रतिशत ही भुगतान हो पाया है, पूर्ण भुगतान नहीं मिलने की वजह से बच्चों के स्कूल की फीस जमा नहीं हुई और बैंक से लिया कर्ज भी नहीं चुका पा रहे हैं। किसान रवि कहना है कि कुछ दिन पूर्व ही उन्होंने अपने मकान का निर्माण शुरू कराया था। उम्मीद थी कि शुगर मिल गन्ना मूल्य भुगतान कर देगी, तो निर्माण पूरा करा दिया जाएगा, लेकिन भुगतान नहीं मिलने की वजह से निर्माण अधर में लटक गया है।