आंखों में नींद, पैरों में छाले... पर जारी है सफर
रोहित अग्रवाल
शामली। लॉकडाउन में काम बंद हुआ तो प्रवासी श्रमिकों की जमा पूंजी भी ज्यादा दिन नहीं चली। कुछ दिन परिचितों ने मदद की, लेकिन फिर हाथ खींच लिए। मकान मालिक किराया मांगने लगा तो गांव लौटने के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचा। सामान बांधा और पैदल ही सैकड़ों मील दूर अपने गांव केे निकल गए। गर्मी की वजह से रात भर चलते थे। पैरों में सूजन भी आ गई। रास्ते में गांव वालों की मदद, गुरुद्वारों के लंगर और मंदिरों के भंडारों के सहारे उम्मीदों के सफर पर चंडीगढ़, मोहाली से शामली तक पहुंचे। पेश है प्रवासी श्रमिकों से बातचीत की रिपोर्ट -
- रोशनी के पैर में आई सूजन, छाले पडे़
उन्नाव के बांगर गांव निवासी हरिशचंद्र का परिवार पंचकुला में बेलदारी करता था। लॉकडाउन के बाद काम छिना तो रोटी के लाले पड़ गए। चार दिन पहले पैदल ही पूरा परिवार निकल गया। रास्ते में पत्नी रोशनी की चप्पल टूट गई। हरिशचंद्र और रोशनी ने एक दूसरे की चप्पल बदलकर पहनीं। रोशनी के पैरों में छाले पड़ गए और सूजन आ गई। मगर उम्मीदों का सफर जारी है।
- बच्चा पूछता रहा, बस कब आएगी
बांगर निवासी हरिशचंद्र बस स्टैंड पर जब बस के बारे में जानकारी करने गया। तो बेटा राजा अपनी मां रोशनी से पूछता रहा कि मम्मी बस कब आएगी। मां दिलासा देती रही, बेटा तेरे पापा पता करने गए हैं।
- बस अड्डे पर पहुंचते ही सो गए मां-बेटे
चंदौसी (मुरादाबाद) निवासी रजनी पत्नी किरणपाल अपनी बेटी रोशनी, आसमी, दिलखुश और बेटे गोलू के साथ पैदल चलकर रोडवेज बस स्टैंड पहुंची। परिवार इतना थका था कि वहां पहुंचते बेटा सो गया। मां ने दुपट्टे के पल्लू से हवा झलनी शुरू कर दी, सफर की थकावट से उसकी भी आंख लग र्गई। बेटियों ने बताया कि मोहाली में पूरा परिवार मजदूरी करता था।
- मंदिर-गुरुद्वारों के सहारे भरा पेट
मुरादाबाद के पालमपुर निवासी सुरेश का परिवार मोहाली के सुहाना रोड पर फैक्टरी में काम करता था। काम बंद हुआ। कुछ दिन जमा पूंजी से काम चला। चार दिन सामान उठाकर पैदल ही घर के लिए निकल गए। रास्ते में कुछ गांव वाले रोटी खिलाते थे, गुरुद्वारों में लंगर चखा, मंदिरों में भंडारे में पेट भरा। एक बार पूरा दिन पानी पीकर भी गुजर की।
- बाल्टी बनी हमसफर
प्रवासी श्रमिक अपने साथ प्लास्टिक की बाल्टी लिए हैं। इसी पर ये रास्ते में बैठते हैं। पीने का पानी भरते हैं। इनमें पानी भरकर ही रास्ते में कहीं नल पर नहा लेते हैं। कुल मिलाकर ये बाल्टियां इनका हमसफर बनी हैं।
कोट-
हरियाणा से जिले में आए 10 हजार से अधिक प्रवासियों को बसों से उनके जिलों में भेज दिया गया है। बिहार, झारखंड और यूपी के अन्य जिलों के करीब 415 प्रवासी श्रमिक पैदल खादर के गांवों के रास्ते यहां पहुंचे हैं। उन्हें शेल्टर होम में भेजकर स्क्रीनिंग की जा रही है। - जसजीत कौर, डीएम शामली
कैराना में लुधियाना से नंगे पैर पैदल चल कर कैराना पहुचा बिहार का श्रमिक अखिलेश कुमार- फोटो : SHAMLI
शामली में सैकडों मील रिक्शा से चलकर पहुंचे श्रमिक आराम करते हुए।- फोटो : SHAMLI
शामली के रोडवेज बस स्टेंड पर बच्चों के साथ बैठा श्रमिक परिवार।- फोटो : SHAMLI
मम्मी हम कब जाएंगे, कब आएगी बस पंजाब के चंडीगढ़ से पैदल सफर तय करके आया ये मासूम बच्चा शामली रोडवेज- फोटो : SHAMLI
लंबा पैदल सफल तय कर चंडीगढ़ के मुहाली से शामली बस स्टेंड पहुंचे एक परिवार। यह मासूम बच्चा पूरी रा?- फोटो : SHAMLI
शामली रोडवेज बस स्टैंड पर लगी प्रवासी श्रमिकों की भीड़।- फोटो : SHAMLI
शामली रोडवेज बस स्टैंड पर मेडिकल जांच के लिए लगाई गई श्रमिकों की लाइन।- फोटो : SHAMLI
नंगे पैर छोटे भाई का हाथ पकडकर चलता किशोर।- फोटो : SHAMLI
शामली रोडवेज बस स्टेंड पर पहुंचे प्रवासी श्रमिक।- फोटो : SHAMLI
कैराना (शामली) में राधा स्वामी सत्संग भवन पर ठहरे यूपी और बिहार के श्रमिक।- फोटो : SHAMLI
कैराना में लुधियाना से पैदल चल कर पहुचा बिहार का श्रमिक कष्णा- फोटो : SHAMLI