शामली। बिहार के प्रवासी श्रमिकों को ले जाने के लिए सहारनपुर से ट्रेनों की व्यवस्था तो हुई है, लेकिन वहीं पर इतने ज्यादा श्रमिक हैं कि शामली में ठहरे श्रमिकों का नंबर आना मुश्किल लग रहा है। हालांकि डीएम स्तर पर सहारनपुर प्रशासन से वार्ता कर प्रयास किया जा रहा है।
डीएम जसजीत कौर के अनुसार सहारनपुर में ही करीब आठ हजार के आसपास प्रवासी बिहार निवासी श्रमिक बताए जा रहे हैं। ट्रेनों में इनकी ही पूर्ति होनी मुश्किल हो रही है, हालांकि सहारनपुर प्रशासन से वार्ता जारी है। मेरठ से भी ट्रेनें जाने की जानकारी मिली है, तो वहां के जिलाधिकारी से भी संपर्क किया गया है। शुक्रवार को 15 बसों की व्यवस्था दूसरे डिपो से हुई है इनसे इन सबको भेजा जा रहा है। उधर, कैराना में छत्तीसगढ़ में गुड़ बनाने का काम करने वाले कैराना क्षेत्र के गांव बरनावी के 12 और गोहाना में ईट भट्ठे पर काम करने वाले गुलशनगर के चार सदस्य भी शेल्टर होम पहुंचे। जिन्हें स्वास्थ्य विभाग ने उनके ही घरों में क्वारंटीन कर दिया। वहीं, कैराना के राधा स्वामी सत्संग भवन में बनाये गये शेल्टर होम पर हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से करीब 300 श्रमिक पैदल चल कर पहुंचे। श्रमिक अखिलेश ने बताया कि वह लुधियाना में मजदूरी करता था। उसके साथी कृष्णा, शिव शंकर, रामू कुमार, मोहन राम, मुन्ना राम व अखिलेश सिंह सभी 11 मई को लुधियाना से बिहार के बेतिया जिले के लिए पैदल चले थे। करनाल के पास उसकी पुरानी चप्पल टूट गई तो वह नंगे पैरों ही चला।