गढ़ीपुख्ता। कस्बे की अग्रवाल धर्मशाला में चल रही श्रीराम कथा के कथावाचक पंडित श्याम सुंदर त्रिपाठी ने अनुसुइयां प्रसंग सुनाया। कहा कि जिस घर व समाज में नारी अपनी मर्यादा में रहती है, वह मार्ग से नहीं भटक सकता।
सीता हरण का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि रावण विकृत विचारों को परिस्थिति का नाम है। जब समाज में विचारों की भिन्नता होती है, तब सत्यता का पतन होता है। शबरी प्रसंग का महत्व समझाते हुए कहा कि श्रीराम ने सर्व समाज को गले लगाया। सुग्रीव मित्रता का अर्थ है।
कथा के अंत में सीता की खोज का अर्थ समझाया कि संस्कृति की खोज है। इस दौरान मोहित मित्तल, टेकचंद मित्तल, शिव कुमार मित्तल, संजय मित्तल, मुकेश गोयल, दीपक गोयल, बुढ़ाना से कमल किशोर गर्ग, संदीप गर्ग, मनोज गर्ग, आकाश गर्ग, अंशुल मित्तल आदि लोग मौजूद रहे।