देश में आज भी ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो अपने माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा के लिए अपना तन मन धन सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार रहते हैं। फिर भले ही उन्हें अपने माता पिता को श्रवण की ही तरह पालकी में बैठाकर पैदल तीर्थ क्यों न कराना पड़े। पानीपत के रहने वाले बब्बन का भी सपना था कि वह अपने मां बाप को ऐसी ही धार्मिक यात्रा कराए। इस बार कांवड़ यात्रा में बब्बन ने अपना यह सपना पूरा किया-