वादी के मुताबिक उसने तीन अगस्त 2018 को टोल फ्री नंबर पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई, जिसका कोई जवाब उसे प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद उसने विपक्षी को रजिस्टर्ड नोटिस 27 अगस्त 2018 को भेजा। इसी बीच उसके खाते में 29 अगस्त 2018 को गन्ने का भुगतान 16044 रुपये आया और बैंक द्वारा 7937 रुपये और 153 रुपये माइनस में चले जाने का चार्ज काटकर 7953 रुपये जमा किए गए।
बैंक शाखा ने कहा कि अपनी समस्या आईसीआईसीआई बैंक शाखा शामली में जाकर बताओ, वह उन्हें सीसीटीवी फुटेज दिखा देंगे। वहां जाने पर उन्होंने एक सप्ताह बाद मिलने को कहा, लेकिन कई बार जाने के बाद भी जब कोई हल नहीं हुआ तो 20 सितंबर 2018 में वादी ने सीसीटीवी फुटेज दिखाए जाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता,सदस्य अमरजीत कौर व अभिनव अग्रवाल ने परिवाद को स्वीकार कर सुनवाई करने के बाद गढ़ीपुख्ता स्थित बैंक शाखा के प्रबंधक को आदेशित किया कि वह 10153 रुपये मय 12 प्रतिशत साधारण ब्याज के साथ और परिवादी को हुई मानसिक, आर्थिक और शारीरिक क्षतिपूर्ति हेतु 20 हजार रुपये और वाद का खर्च पांच हजार रुपये परिवादी को अदा करने हेतु आयोग में जमा करें।
विपक्षी द्वारा सेवा में कमी एवं अनुचित व्यापार व्यवहार करने के लिए विपक्षी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया। अर्थदंड की धनराशि वादी को देय न होकर नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी।