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Shamli News: ड्रेनेज अधूरा, निगरानी कमजोर, एक्सप्रेसवे पर खुल गई पोल

Sat, 04 Jul 2026 12:09 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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शामली। करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से बने दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने का मामला अब सिर्फ बारिश तक सीमित नहीं रह गया है। जांच और एनएचएआई की कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि यह घटना व्यवस्था की चूक, कमजोर निगरानी और अधूरी ड्रेनेज व्यवस्था का नतीजा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब खेड़ा मस्तान के पास जल निकासी को लेकर महीनों से विवाद और विरोध चल रहा था, लेकिन समय रहते उस पर कार्रवाई नहीं की गई। अगर स्थानीय स्तर पर समस्याओं को छिपाने या टालने के बजाय समाधान पर काम होता तो सड़क धंसने जैसी नौबत और विभाग की किरकिरी दोनों से बचा जा सकता था।
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दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे के पैकेज-2 में किमी 55+480 पर एक जुलाई की बारिश के बाद सड़क की ढलान धंस गई थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो एनएचएआई हरकत में आया। बागपत इकाई ने इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी के टीम लीडर कुलदीप कुमार राजदान और निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर नागेंद्र पाल सिंह को निलंबित कर दिया। एक सहायक अभियंता को डिबार किया गया है, जबकि तीन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
एनएचएआई की रिपोर्ट में माना गया है कि संबंधित स्थान पर बारिश के पानी की निकासी के लिए बैलेंसिंग कलवर्ट यानी पुलिया बनाया गया था, लेकिन उसे स्थायी ड्रेनेज सिस्टम से जोड़ा ही नहीं जा सका। दूसरा लोगों के विरोध के चलते सड़क के नीचे बनी पानी निकालने वाली नाली वाहनों के आवागमन के लिए इस्तेमाल होती रही और जल निकासी व्यवस्था अधूरी पड़ी रही। भारी बारिश के दौरान पानी सड़क किनारे जमा हुआ और सड़क की सतह धंस गई। यही नहीं, ढलान सुरक्षा, चूट ड्रेन और स्थायी सुरक्षा उपाय भी समय पर पूरे नहीं किए गए।
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सबसे अहम बात यह है कि ग्रामीणों का विरोध कोई एक-दो दिन पुराना नहीं था। स्थानीय स्तर पर पिछले करीब 10 महीने से ड्रेनेज सिस्टम को लेकर विरोध और असहमति की स्थिति बनी हुई थी। सवाल यह है कि जब परियोजना से जुड़े अधिकारी, निर्माण एजेंसी और एनएचएआई के स्थानीय जिम्मेदार इस स्थिति से वाकिफ थे तो शासन और लखनऊ स्थित उच्चाधिकारियों को पूरी गंभीरता से क्यों नहीं बताया गया। यदि समय रहते स्थायी विकल्प तैयार किया जाता, तो एक्सप्रेसवे की सड़क धंसने और करोड़ों की परियोजना पर सवाल उठने से बचा जा सकता था।
निर्माण के दौरान जल निकासी व्यवस्था मानकों के अनुरूप नहीं बनाई गई, ढलान सुरक्षा अधूरी रही और गुणवत्ता की निगरानी भी कमजोर पाई गई। यही कारण है कि बारिश ने एक साथ पूरी व्यवस्था की पोल खोल दी। एनएचएआई ने अपनी रिपोर्ट में माना कि संबंधित स्थान पर ड्रेनेज सिस्टम चालू नहीं हो सका था। संवाद

जांच की जा रही
एनएचएआई बागपत के परियोजना निदेशक नरेंद्र सिंह का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया पर दस हजार से ज्यादा शिकायतें
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने के मामले ने सोशल मीडिया पर भी तूल पकड़ लिया है। एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर, देहरादून, दिल्ली समेत अन्य स्थानों के दस हजार से अधिक लोग एक्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज करा चुके हैं। उधर, शामली के मोहित ने एक्स पर लिखा कि एक्सप्रेसवे पर समय रहते सुधारात्मक कदम उठा लिए जाते तो यह स्थिति नहीं आती। रितिका ने कहा कि केवल तीन लोगों पर कार्रवाई से बात नहीं बनेगी, बल्कि जिम्मेदार आला अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सपा के कैराना लोकसभा प्रभारी प्रोफेसर सुधीर पंवार ने कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए और जो भी जिम्मेदार हों, उन सभी पर कार्रवाई होनी चाहिए। उधर दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे किसान संघर्ष समिति के सचिव विदेश मलिक ने कहा कि एक्सप्रेसवे की खामियों को लेकर शामली के किसान जल्द ही डीएम आलोक यादव से मिलकर ज्ञापन देंगे। भाकियू अराजनीतिक के जिलाध्यक्ष कालिंदर मलिक ने कहा कि खामियों को लेकर पहले भी अधिकारियों को अवगत कराया गया था, लेकिन समय रहते सुधार नहीं किया गया।

कहां-कहां हुई चूक
ड्रेनेज सिस्टम अधूरा रहा : नाली बनने के बावजूद उसे स्थायी जल निकासी व्यवस्था से नहीं जोड़ा जा सका।
स्थानीय विरोध को हल्के में लिया गया : खेड़ा मस्तान के पास करीब 10 महीने से विरोध था, लेकिन समय रहते समाधान नहीं निकाला गया।
ढलान सुरक्षा अधूरी छोड़ी गई : ढलान की स्थायी सुरक्षा, ड्रेन और स्लोप प्रोटेक्शन कार्य पूरे नहीं हुए।
गुणवत्ता निगरानी में लापरवाही : अथॉरिटी इंजीनियर और निर्माण एजेंसी समय पर खामियां पकड़ने और सुधार कराने में विफल रहे।
उच्च अधिकारियों को समय पर अलर्ट नहीं : स्थानीय स्तर पर विवाद और तकनीकी दिक्कतों की गंभीर सूचना समय रहते ऊपर तक नहीं पहुंचाई गई।
एक नजर में एक्सप्रेसवे
कुल लंबाई : 210 किलोमीटर
लागत : करीब 12 हजार करोड़ रुपये
शामली जिले में लंबाई : करीब 30 किलोमीटर
लेन : 6, भविष्य में 8 लेन तक विस्तार योग्य
यह है मामला

एक जुलाई की बारिश के बाद एक्सप्रेसवे पर करौंदा महाजन-खेड़ा मस्तान के पास एक हिस्से में सड़क धंस गई थी, दो जगह गहरे गड्ढे हो गए थे। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। बाद में एनएचएआई ने क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कर यातायात बहाल कराया था।
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