शामली। चंद दिनों में अमीर बनाने, बेहतर भविष्य का सपना दिखाते हुए युवाओं को विदेश भेजकर ठगी की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय ठगी गिरोह के पकड़े गए तीन सदस्यों की पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि हरियाणा के यमुनानगर का उदित, गुजरात के अहमदाबाद का वंतद तीन साल से गिरोह की कमान संभाले हुए है।
यह गैंग वेस्ट यूपी के अलावा हरियाणा और देशभर के पचास हजार से अधिक युवाओं को फेसबुक, इंस्टाग्राम और मोबाइल गेम्स के माध्यम से झांसे में लेकर ठगी कर चुका है। युवाओं को बहकावे में लेकर मलेशिया, म्यांमार में मैनेजर, क्लर्क की नौकरी के बहाने भेज दिया जाता है, जहां पर उनसे साइबर ठगी कराई जाती है।
इस तरह युवाओं को फंसाते हैं गिरोह के सदस्य
एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया है कि यमुनानगर के उदित और अहमदाबाद के वंतद गिरोह के सरगना हैं, जो चीन में बैठे तीसरे साथी के साथ ठगी का रैकेट चला रहे हैं। गिरोह के सदस्य बेरोजगार और कम पढ़े-लिखे युवाओं की फेसबुक, इंस्टाग्राम, मोबाइल गेम्स से डिटेल प्राप्त करते हैं। इसके बाद टेलीग्राम पर वर्क फ्रॉम होम, डाटा एंट्री, आईटी, बीपीओ जॉब के आकर्षक विज्ञापन दिखाते हुए झांसा देकर उन्हें विदेश बुला लेते हैं। चीन में गिरोह का मुख्य सरगना ठगी गई रकम का 10 से 15 प्रतिशत सदस्यों को कमिशन के रूप में देता है।
जिले के विदेश भेजे गए छह युवक विदेश मंत्रालय के सहयोग से लौटे
शामली के अलावा वेस्ट यूपी के बागपत, गाजियाबाद, बिजनौर, मेरठ, सहारनपुर के लोग कॉल सेंटर पर बैठे हैं, जिनकी मदद से विदेश भेजकर युवकों से साइबर ठगी कराई जाती है। जिले के विदेश भेजे गए छह युवक अभी तक विदेश मंत्रालय के सहयोग से वापस आए हैं।
पुलिस ने गिरोह का किया था खुलासा
30 जनवरी को पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह के तीन सदस्यों राहुल (काशीनगर), धर्मेंद्र (हापुड़) और अमन (लखीमपुर खीरी) को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट के नाम पर 20 करोड़ से अधिक रुपये ठगी के रूप में इकट्ठे किए। 34 बैंक खातों और 78 मोबाइल सिमों के माध्यम से ठगी को अंजाम दिया गया। वांछित सदस्यों की तलाश में पुलिस जुटी है।
नौजवानों के लिए चेतावनी
एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि युवाओं को विदेश नौकरी के लिए सिर्फ सरकारी मान्यता प्राप्त एजेंट से ही संपर्क करें। सोशल मीडिया या गेम्स पर किसी भी जॉब ऑफर पर भरोसा न करें। अपने पासपोर्ट और निजी दस्तावेज किसी एजेंट को न दें। ठगी होने पर साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत करें। साथ ही डॉट से शुरू होने वाले किसी भी गेम्स को डाउनलोड नहीं करें।
ये युवा आए वापस
फरीद (शहर पंसारियान) – थाईलैंड में नौकरी का झांसा देकर म्यांमार भेजा गया। 22 फरवरी को संयुक्त बचाव अभियान के बाद सुरक्षित वापस आया।
नदीम (गांव केरटू) – 21 जनवरी को विदेश भेजा गया, भारतीय दूतावास की मदद से 10 नवंबर 2025 को सुरक्षित घर लौटा।
शहर के काजीवाड़ा और कांधला के हमजा, अकरम, अनस, आकिल और कैफ – विदेश में नौकरी के बहाने 26 लाख रुपये ठग लिए गए। मलेशिया भेजे गए युवकों को बंधक बनाकर रखा गया और भूखा रखा गया।
ट्रांसलेटर एप्लीकेशन की मदद से करते हैं बातचीत
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि साइबर ठग 10 से 15 प्रतिशत तक कमीशन का लालच देकर लोगों के म्यूल खाते इस्तेमाल करते थे। खाताधारक के नाम से नया मोबाइल सिम लेकर उसका प्रयोग साइबर ठगी में किया जाता था। गिरोह के सदस्य ट्रांसलेटर एप्लीकेशन के माध्यम से चीन के सरगना से बातचीत करते थे।