शामली। जलालाबाद में वर्ष 2015-16 में 25 किलोमीटर लंबी एबीसी लाइन डालने के दौरान किए गए 57.10 लाख रुपये के घोटाले का मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। ऊर्जा निगम के एमडी कार्यालय ने इस मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की है। शामली के स्थानीय अधिकारी भी जांच में सहयोग करेंगे।
व्यापारी माजिद ने आरोप लगाया था कि डालने के लिए भेजी गई एबीसी केबिल को बेचकर 57.10 लाख रुपये का गबन किया गया। तत्कालीन डीएम के निर्देश पर एडीएम ने जांच कराई। जांच में तत्कालीन एक्सईएन प्रमोद कुमार, एसडीओ नरेश कुमार और जेई आलोक कुमार दोषी पाए गए थे। हालांकि उस समय केवल जेई पर ही कार्रवाई हुई। इस मामले में कार्रवाई व रिकवरी के लिए डीएम ने शासन को पत्र लिखा था। माना जा रहा है कि अब नई जांच में उस समय दोषी पाए गए एक्सईएन और एसडीओ पर भी कार्रवाई हो सकती है। थानाभवन के एसडीओ विकास कुमार ने बताया कि एमडी कार्यालय से गठित दो सदस्यीय समिति ने जांच शुरू कर दी है। अधीक्षण अभियंता वीरेंद्र कुमार ने कहा कि समिति को हर संभव सहयोग दिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। संवाद
पूर्व जांच टीम ने पाया कि केबिल डालने का काम दो चरणों में होना था।
पहला चरण : 9,329 मीटर केबल डालनी थी, लेकिन मौके पर केवल 5,904 मीटर ही मिली। 216 डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स मिलने थे, मौके पर केवल 57 ही मौजूद थे।
दूसरा चरण : 12,000 मीटर से अधिक केबल डालनी थी, लेकिन मौके पर केवल 7,000 मीटर ही मिली। इसके अलावा अन्य खामियां भी पाई गई थी।
नए दौर की जांच
घोटाले की टाइमलाइन
2015-16: जलालाबाद में 25 किलोमीटर लंबी एबीसी लाइन डालने का काम शुरू।
पहली जांच : तत्कालीन डीएम के निर्देश पर एडीएम ने जांच कराई। तत्कालीन एक्सईएन, एसडीओ और जेई दोषी पाए गए।
निलंबन : जेई को निलंबित किया गया, बाकी अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए शासन को लिखा गया था
2026 : एमडी कार्यालय ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित कर मामले की नई जांच शुरू की है।