रविंद्र सिंह खेती करने के साथ ही निजी स्कूल की वैन भी चलाते थे। उनके भतीजे सचिन चौहान ने बताया कि चाचा रविंद्र शुक्रवार रात करीब दस बजे गांव के पास अपने खेत पर गए थे। वहां पर लगे खंभे के पास घास में छिपे सांप ने उनके पैर की अंगुली में काट लिया। उन्होंने घर पहुंचकर सर्पदंश व पेट में दर्द होने की जानकारी दी। परिजन उन्हें तत्काल गांव में निजी चिकित्सक के यहां ले गए। चिकित्सक ने दर्द निवारक दवा देकर शामली ले जाने की सलाह दी।
इसके बाद वे शामली में निजी अस्पताल ले गए। करीब एक घंटे बाद चिकित्सक ने उन्हें मेरठ ले जाने की सलाह दी। परिजन मेरठ न ले जाकर झाड़फूंक करने वाले सपेरों के यहां ले गए। रातभर झाड़फूंक कराने के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ। सुबह परिजनों को किसी ने बताया कि सरकारी अस्पताल में सर्पदंश के उपचार के लिए एंटीस्नेक वेनम उपलब्ध है।
इसके बाद परिजन किसान को लेकर सुबह आठ बजे जिला अस्पताल पहुंचे। चिकित्सकों ने जांच के बाद किसान को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सचिन चौहान ने बताया कि रविंद्र की मौत के बाद परिवार में पत्नी व बड़ा बेटा शुभम (10) व बेटी खुशी (8) रह गई हैं।
तीन दिन पहले समय पर इलाज न मिलने से किशोर की हुई थी मौत
शामली। कांधला क्षेत्र गांव हाजीपुर दुगड्डा निवासी कक्षा छह के छात्र अर्श (12) पुत्र सरवर जिला सहारनपुर के गांव घाटमपुर में अपने मामा के यहां गया था। वहां पर बुधवार रात को गद्दे पर सोते समय सर्पदंश होने पर परिजन निजी चिकित्सक व हकीम के यहां इलाज कराते रहे। छह घंटे बाद जिला अस्पताल शामली पहुंचे लेकिन तब तक किशोर की मौत हो चुकी थी।
ये बोले डॉक्टश्र
सर्पदंश पीड़ित को जल्द से जल्द अस्पताल लेकर पहुंचना चाहिए। झाड़फूंक के चक्कर में पड़कर समय खराब न करें। अस्पताल में एंटीस्नेक वेनम पर्याप्त मात्रा में निशुल्क उपलब्ध है।
-डॉ. मनोज कुमार अखौरी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल
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