शामली में बदमशों से मुठभेड़ के दौरान आशंका है कि इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं पहनी थी, इसी कारण उनको गोलियां लगीं। इस मामले की विभागीय जांच शुरू होने की बात कही जा रही है।
झिंझाना के उदपुर के ईंट भट्ठे पर हुई मुठभेड़ में शहीद हुए जांबाज इंस्पेक्टर सुनील कुमार की जान कहीं एसटीएफ की चूक से तो नहीं गई। इंस्पेक्टर सुनील कुमार की मौत के बाद यह सवाल उठ रहा है। विभागीय अधिकारियों ने मुठभेड़ के दौरान नियमों का पालन किया या नहीं, इसकी जांच गोपनीय तरीके से शुरू कर दी गई है। महकमे में सवाल उठ रहे हैं कि इंस्पेक्टर बुलेट जैकेट पहने होते तो उनकी जान बच सकती थी।
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अधिकारियों के अनुसार, सोमवार सुबह 11 बजे एसटीएफ टीम पुलिस लाइन मेरठ कार्यालय से रवाना होकर झिंझाना पहुंची थी। सूचना थी कि मुकीम काला गैंग का एक लाख का इनामी अरशद अपने साथियों के साथ हरियाणा से चौसाना क्षेत्र में वारदात को अंजाम देने के लिए आने वाला है। इसके बाद रात करीब 11 बजे हरियाणा की तरफ से सफेद रंग की ब्रेजा कार आई, जिसे टीम ने रुकवाने का प्रयास किया था तो बदमाशों ने एसटीएफ टीम पर फायरिंग शुरू कर दी थी। टीम ने आधा घंटे तक एनकाउंटर चलने का दावा किया था। इसमें चार बदमाश एक लाख का इनामी अरशद, संजीव, मंजीत और मनवीर ढेर हो गए थे, जबकि इंस्पेक्टर सुनील कुमार घायल हुए थे। उन्हें गुरुग्राम के अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, इंस्पेक्टर एके 47 लेकर गए थे और उन्होंने गोली भी चलाई थीं। हालांकि एसटीएफ एसपी बृजेश सिंह मुठभेड़ के दौरान नियमों का पालन करने की बात कह रहे हैं।
दो तरह से होती है मुठभेड़
रिटायर्ड सीओ कर्मवीर सिंह का कहना है कि एक तो पुलिस मुठभेड़ वह होती है, जब अचानक ही बदमाशों से पुलिस का सामना हो जाता है। उस दौरान पुलिस के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट या फिर वेरी लाइट पिस्टल, फ्लेयर गन का प्रयोग करना जरूरी नहीं होता है। क्योंकि उस समय जो भी कुछ होता है, अचानक होता है। उसमें पुलिसकर्मी की जान भी जा सकती है। वहीं, दूसरी तरह से मुठभेड़ मुखबिर द्वारा सूचना देने पर बदमाशों की घेराबंदी करने के दौरान होती है। इसमें एसटीएफ टीम जाती है तो सबसे पहले इसकी सूचना अपने एसपी को देनी होती है। इसके बाद दो हिस्सों में पुलिस टीम को बांटा जाता है। एक को प्रथम पार्टी तो दूसरी को दूसरी पार्टी कहा जाता है। प्रथम पार्टी में जो सदस्य शामिल होते हैं, उन्हें बुलेट प्रूफ जैकेट से लैस किया जाता है, पिस्टल भी उनके पास होती है। वही सबसे पहले बदमाशों के सामने पहुंचते हैं।
दूसरी पार्टी में शामिल पुलिसकर्मी जिस स्थान पर बदमाश बताए गए हैं, उससे कुछ दूरी पर होते हैं। इनके पास पिस्टल होना जरूरी होता है। प्रथम पार्टी के पास वेरी लाइट पिस्टल और मिनी फ्लेयर गन का होना जरूरी होता है। वेरी लाइट गन को इस प्रकार से बनाया गया है कि इसका इस्तेमाल सिग्नल देने के लिए किया जाता है। जब कोई किसी खतरे में हो और सहायता चाहते हों तो फायर करते हैं, जिससे पुलिसकर्मी की पोजिशन और लोकेशन का पता लग सके। इसके अलावा मिनी फ्लेयर गन का उपयोग जब पुलिसकर्मियों संकेत भेजने की आवश्यकता होती है, तो इसका उपयोग किया जा सकता है। यह 15 से 20 मिनट तक जहां पर छोड़ा जा रहा है उस स्थान को रोशन करता है। ताकि बदमाशों को पकड़ने में आसानी हो सके।