राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अनुशासन, संयम, सेवा और सहनशीलता ही स्वयंसेवक की पहचान है। भागवत ने स्वयंसेवकों से कहा कि वे शिविर में मिले ज्ञान को संसार को बांटे और एक सशक्त राष्ट्र निर्माण में अपना सहयोग दें। सशक्त भारत के लिए गांव और किसान भी खुशहाल होने चाहिए।
शनिवार को सिल्वर बेल्स स्कूल में चल रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघ शिक्षा वर्ग के द्वितीय वर्ष के प्रशिक्षण शिविर में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ का उद्देश्य सबको साथ लेकर चलना है। समाज को एकता के सूत्र में बांधना है। सशक्त संगठित और समरसता के बल पर एक मजबूत राष्ट्र निर्माण ही संघ का उद्देश्य है। किसी भी व्यक्ति के निर्माण के लिए उसके संस्कार भी काफी अहम होते हैं। इसलिए परिवारों में अच्छा माहौल भी बेहद जरूरी है। वहां का माहौल अच्छा होता तो बच्चों में भी अच्छे संस्कार पैदा होंगे। प्रशिक्षण में जो सीखा है उस ज्ञान को समाज को बांटें। समरसता और सेवाभाव से ही उन्हें समाज और राष्ट्रहित में काम करना है। इसमें अड़चनें आएंगी, लेकिन उन्हें भी संयम और सहनशीलता से सफलतापूर्वक पार करके अपने उद्देश्य तक पहुंचना है। गांव के विकास के बिना देश सशक्त नहीं बन सकता। इसके लिए किसानों को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाना होगा। जैविक खेती किसानों की खुशहाली का आधार बन सकती है। स्वयंसेवकों को इस दिशा में भी काम करना चाहिए। शनिवार को शिविर में प्रदेश के गन्ना राज्यमंत्री सुुरेश राणा, कैराना सांसद प्रदीप चौधरी, मेरठ सांसद राजेंद्र अग्रवाल, विधायक शामली तेजेंद्र निर्वाल, भाजपा के क्षेत्रीय मंत्री अश्वनी त्यागी समेत कई भाजपा नेता भी शिविर में पहुंचे।
संघ प्रमुख भागवत दिल्ली गए
संघ प्रमुख शनिवार दोपहर तक शिविर में रहे। इसके बाद भोजन और कुछ देर आराम करने के बाद दोपहर करीब 2.48 बजे शिविर स्थान से पानीपत के रास्ते दिल्ली चले गए। उनके जाते समय भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। स्थानीय पुलिस ने पूरे परिसर की घेराबंदी कर ली थी। पुलिस के अलावा एलआईयू टीम भी यहां डटी रही।