अमर उजाला ब्यूरो
शामली। सिक्कों की खनक में यमुना नदी से अवैध रेत खनन चल रहा है। पिछले दिनों हाईकोर्ट ने खनन पर रोक लगाने का आदेश दिया था। इसके बावजूद यमुना नदी में बेरोकटोक खनन चल रहा है। खनन भला चले क्यों ना, क्योंकि इसमें खाकी से लेकर खादी तक जो लिप्त हैं। सूत्रों की मानें, तो करोड़ों रुपये के इस खेल को अफसर चाहकर भी बंद नहीं करा पा रहे हैं।
शामली जिले में यमुना नदी से अवैध रेत खनन का धंधा झिंझाना, कैराना और कांधला क्षेत्र में चल रहा है। कांधला के इस्सोपुर टील के जंगल में यमुना नदी से खनन के बाद कुर्क किए रेत के स्टाक को उठवाने के नाम पर अवैध खनन चल रहा है। खनन से होने वाली मोटी कमाई के कारण ही दो गुटों में टकराव भी हो चुका है और कई बार गोलियां तक चलीं। इसमें एक पार्टी हरियाणा की रहने वाली है।
वहीं, झिंझाना क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर रेत खनन चल रहा है।
उसका अंदाज झिंझाना के बिड़ौली की तरफ से रेत से भरी ट्रालियों और डंपरों के आने से सहज ही लगाया जा सकता है। इसके अलावा कैराना क्षेत्र के यमुना किनारे बसे खुरगान, रामड़ा, पठेड और मवी की तरफ से रेत खनन चल रहा है।
उगाही के अड्डे
जिले में कई स्थानों पर अवैध वसूली चलती है। अकेले झिंझाना क्षेत्र में बिडौली, अहमदगढ़, गाडीवाला चौराहा, टिटौली, रसूलपुर गुजरपुर, खोडसमा और चौसाना। इसके अलावा कैराना क्षेत्र में यमुना नदी पुल, कंडेला औद्योगिक क्षेत्र, जगनपुर स्टैंड और कैराना बाईपास तिराहे पर वसूली चल रही है। इसकी तरह कांधला क्षेत्र में इस्सोपुर टील, डूंडूखेड़ा, कांधला समेत कई स्थानों पर पुलिसकर्मी रेत के वाहनों से वसूली करते हैं।
फिर क्यों बंधे हैं हाथ
सितंबर माह में शामली के साहब राज सिंह ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका डाली थी। उन्होंने रेत खनन से पर्यावरण को हो रहे नुकसान का हवाला दिया था। उस पर मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने इस मामले में प्रदेश सरकार से जवाब मांगा था। साथ शामली जिले के डीएम और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को आदेश देकर रेत खनन पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाने को कहा था। हाईकोर्ट के इस आदेश के बावजूद स्थानीय पुलिस प्रशासन रेत खनन बंद कराने में नाकाम साबित हो रहा है।