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गणतंत्र दिवस के सच्चे प्रहरियों को सलाम

Thu, 25 Jan 2018 11:54 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली
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Republic Day - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। गणतंत्र दिवस के सच्चे प्रहरियों को देश और संविधान के प्रति आस्था जगाने के लिए सच्चे प्रहरियों को सलाम किया जाना चाहिए। 68 साल पूर्व 1950 में पहला गणतंत्र दिवस मनाया गया था। इसके बाद हर साल दर साल गणतंत्र दिवस के प्रति लोगों में उल्लास बढ़ता रहा। इस उत्सव के तौर तरीके बदल गए। हालांकि राष्ट्र के प्रति प्रेम और उत्सव का जुनून लगातार बढ़ता ही गया। शिक्षण संस्थाओं से लेकर सामाजिक संस्थाएं हर्षोल्लास से गणतंत्र दिवस मनाती हैं। कई लोग सामाजिक कार्यों में बगैर स्वार्थभाव से काम कर रहे हैं।
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शुक्रवार को 69 वां गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। जिलेभर की शिक्षण संस्थाओं में महोत्सव होगा, तो कलक्ट्रेट मुख्यालय पर झंडारोहण के साथ ही पुलिस लाइन में भव्य समारोह का आयोजन होगा। पुलिस लाइन में परेड की सलामी प्रदेश के गन्ना विकास राज्यमंत्री सुरेश राणा लेंगे। वहीं, प्रथम गणतंत्र दिवस के साक्षी रहे कई लोगों से बातचीत में निकलकर यह बात सामने आई कि गणतंत्र दिवस का उल्लास और उत्साह हर वर्ष बढ़ता गया है। पहले इतनी चकाचौंध तो नहीं थी, लेकिन राष्ट्र के प्रति प्रेम अभूतपूर्व था।

ऐसा था पहला गणतंत्र दिवस

गांव भैंसवाल निवासी 81 वर्षीय बाबा सूरजमल बताते हैं कि पहले गणतंत्र दिवस के दौरान मैं करीब 14 वर्ष का था। उस समय संचार के ज्यादा साधन नहीं थे, लेकिन कई दिन पहले से लोगों को पता चल गया था कि गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। उनके गांव तथा  शामली में भी उस दौरान प्रभातफेरियां निकाली गई थीं, लोग तिरंगा झंडा लहराते हुए हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते चल रहे थे। प्रभात फेरियों में नवयुवकों की भीड़ ज्यादा होती थी। वहीं, पंजोखरा निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पलटूराम बताते हैं कि अंग्रेजी हुकूमत से आजादी मिलने के बाद 1950 में जब गणतंत्र दिवस मनाया गया, तो देशभर की जनता में खुशी का माहौल हो गया था। जिला मुख्यालय के साथ ही प्रमुख गांवों में भी इस दिन खुशी मनाई गई थी।
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गणतंत्र के प्रहरी
गणतंत्र दिवस पर ऐसे लोग भी सराहना के पात्र हैं, जो बगैर किसी लालच के समाज हित में कार्य कर रहे हैं। इनमें अग्रवाल मित्र मंडल के नवीन कुमार गर्ग और अनुज बंसल भी ऐसी ही मिसाल हैं। जनसामान्य से जुड़ी समस्याओं को लेकर वह कई वर्षों से प्रयासरत हैं।

उनके पास जो भी अपनी समस्या लेकर पहुंचता है, तो वह उस संबंध में स्थानीय अधिकारियों के साथ ही मुख्यमंत्री से लेकर पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों के पास तक उसके हक में न्याय की लड़ाई लड़ते रहे। इसी तरह प्रोफेसर उमर सैफ भी प्रदूषण के खिलाफ और पर्यावरण संरक्षण तथा नदियों के संरक्षण को लेकर अभियान चला रहे हैं। उमर सैफ ने अपनी टीम के साथ काठा नदी और कृष्णा नदी के जीर्णोद्धार पर अभियान चलाया।

यह दोनों नदी प्रदूषण और अतिक्रमण के कारण मृतप्राय: हो चुकी है। लगातार अभियान चलने के बाद मंडलायुक्त दीपक कुमार अग्रवाल ने भी इसे सराहा और शासन स्तर से काठा नदी जीर्णोद्धार के लिए एक करोड़ रुपये भी स्वीकृत हो गए। गांव खंदरावली निवासी ईश्वरपाल चौहान पर्यावरण संरक्षण के लिए अलग ही अंदाज में मुहिम चला रहे हैं। वह प्रतिदिन साइकिल से गांव दर गांव घूमते हैं और लोगों को पौधरोपण के प्रति जागरूक करते हैं। उनकी यह मुहिम बीते करीब 15 साल से चल रही है। उन्होंने फ्रेंड्स ऑफ एनवायरमेंट फॉर एनीमल्स एंड पीस संस्था भी बनाई हुई है, जिसमें युवाओं को जोड़कर वह कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए भी मुहिम चला रहे हैं।


देश के लिए शहीद हो गया अंकित

एक तरफ देश की सीमा पर सैनिक डटे रहते हैं, तो देश के भीतर जनता की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वालों की कोई कमी नहीं हैं। शामली जिले में बदमाशों से लगातार मुठभेड़ हुई, पुलिस ने बीते छह महीने के दौरान पांच बदमाशों को एनकाउंटर में मार गिराया। वहीं, कैराना के गांव जंधेड़ी में एक लाख के इनामी बदमाश साबिर से एनकाउंटर में सिपाही अंकित तोमर शहीद हो गया था।
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