शामली। पिछले कुछ वर्षों में अपराध का स्वरूप तेजी से बदला है। जहां एक ओर लूट और डकैती जैसे पारंपरिक अपराधों में करीब 70 प्रतिशत तक कमी आई है, वहीं साइबर अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। अब अपराधी घर बैठे ही लोगों की मेहनत की कमाई पर डाका डाल रहे हैं। बीते वर्षों की तुलना में वर्तमान में रोजाना ही साइबर ठगी के मामले सामने आ रहे हैं।
n पढ़े-लिखे लोग बन रहे निशाना : पुलिस द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद साइबर ठग अब पढ़े-लिखे लोगों को भी निशाना बना रहे हैं। हाल ही में एक सेवानिवृत्त शिक्षक से निवेश के नाम पर 80 लाख रुपये की ठगी की गई, जबकि एक अन्य सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी से 20 लाख रुपये ठग लिए गए। पुलिस के अनुसार जिले में करीब 70 प्रतिशत साइबर ठगी निवेश के झांसे और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की जा रही है।
n हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क : एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि साइबर अपराध पर नियंत्रण पुलिस की प्राथमिकता है। इसके लिए प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित की गई है और प्रशिक्षित पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। साथ ही साइबर सेल और थानों में तैनात एसआई को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
n म्यूल खातों का बढ़ रहा इस्तेमाल : साइबर ठग लोगों को ठगने के लिए म्यूल खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल ही में पुलिस ने मुंबई और शामली से जुड़े एक दंपति को गिरफ्तार किया था, जो ठगी की रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर कमीशन लेते थे। इस मामले में करीब 98 लाख रुपये होल्ड कराए गए थे। इसके अलावा झिंझाना क्षेत्र में एक व्यापारी के खाते का दुरुपयोग कर 35 लाख रुपये का लेन-देन किया गया था। बाबरी थाना क्षेत्र में भी म्यूल खातों के जरिए साइबर ठगी का मामला सामने आ चुका है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध को रोकना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन तकनीकी संसाधनों और जागरूकता अभियानों के जरिए इस पर काबू पाने के प्रयास लगातार जारी हैं।