नोटबंदी के बाद से जिले के किसान खाद और बीज के लिए तरस रहे हैं। क्योंकि सहकारी बैंकों, सहकारी समितियों और बाजार में खाद, बीज विक्रेताओं के यहां 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट नहीं लिए जा रहे हैं।
पर्याप्त करेंसी न होने के कारण बैंक भी किसान को पैसा देने में असमर्थ हैं, ऐसे में नेट बैंकिंग की आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रास सेटलमेंट) सुविधा किसानों की मददगार साबित हो सकती है।
आठ नवंबर की शाम नोट बंदी आदेश आने के बाद बीज-खाद न मिलने से जिले में गेहूं की बुवाई भी प्रभावित हो रही है। इस बार जिले को गेहूं बुवाई का लक्ष्य 54 हजार 775 हेक्टेयर रखा गया है। नोट बंदी का आदेश आने के बाद खाद- बीज न मिलने से अभी तक मात्र 14 हजार 75 हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हो पाई है।
ऐसे में उत्तर प्रदेश शासन ने किसानों के लिए खाद-बीज खरीदने के लिए आरटीजीएस की व्यवस्था की थी, किंतु किसान इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। यदि किसान इसका लाभ उठाएं तो उनका तीसरे दिन इफ्को, कृभको जैसी संस्था के नामित बैंक में खाद का भुगतान क्लीयर हो जाएगा।
इफ्को केंद्र प्रभारी राजेंद्र कुमार ने बताया कि स्टेट बैंक इफ्को का नामित बैंक है। किसान संस्था के एसबीआई खाते में धनराशि जमा करा सकते हैं। किसानों की धनराशि संस्था के खाते में आने के बाद इफ्को केंद्र से खाद उठवा दिया जाएगा। नोटबंदी के बाद यूरिया, डीएपी, एनपीके की पचास प्रतिशत बिक्री रह गई है। जिला मुख्यालय के इफ्को के केंद्र पर प्रतिदिन यूरिया की 30-35 बोरे, डीएपी 50 बोरो, एनपीके 30 बोरो की बिक्री हो रही है।
कृषि विभाग के गोदाम पर 500, 1000 के नोट बंद ः कार्यवाहक कृषि उपनिदेशक और जिला कृषि अधिकारी आनंद त्रिपाठी ने बताया कि कृषि विभाग के बीज गोदाम पर 1000, 500 का नोट किसानों से नहीं लिया जा रहा है।
कृषि विभाग के बीज गोदाम पर 1634 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं का बीज उपलब्ध है, अभी तक 550 क्विंटल बीज की ही बिक्री हो सकी है। सरसों का बीज 1955 रुपये प्रति क्विंटल है, इसमें से ज्यादातर की बिक्री हो गई है। मसूूूूर का भी ज्यादातर बीज बिक चुका है। नोटबंदी से गेहूं की बुआई पर प्रभावित हुई है।
नेट बैंकिंग है आरटीजीएस
यह एक नेट बैंकिंग की प्रक्रिया है। इसके अंतर्गत आप किसी भी वर्किंग डे में अपने खाते से किसी दूसरे खाते में तत्काल फंड ट्रांसफर कर सकते हैं। इसके बदले बैंक ग्राहक से कुछ चार्ज भी लेता है।