संवाद न्यूज एजेंसी
कैराना। भले ही युद्ध पर विराम लग गया हो मगर सेना से रिटायर हुए फौजियों का कहना है कि वह आज भी एक फोन कॉल पर बिना तनख्वाह लिए बॉर्डर पर जाकर पाकिस्तान को धूल चटाने के लिए तैयार हैं।
गांव बुच्चखेड़ी निवासी सेना से रिटायर हुए भोपाल फौजी ने बताया कि 1979 में उसकी पोस्टिंग 19 महार रेजिमेंट में हुई थी। 2007 में वे रिटायर हो गए थे। 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान वह करीब एक साल तक पंजाब में रहे। ढाई साल तक श्रीलंका में शांति सेना में शामिल रहे।
1999 में पाकिस्तान के साथ कारगिल युद्ध लड़ा है। आतंकवादियों द्वारा पहलगाम में निर्दोष सैलानियों की हत्या के बाद पूरे देश में पाकिस्तान और उसके आतंकवादियों के खिलाफ गुस्सा है। वह सिर्फ एक फोन कॉल पर बिना तनख्वाह लिए वर्दी और हथियार लेकर पाकिस्तान सीमा पर जाने का तैयार हैं। बुच्चखेड़ी निवासी रिटायर्ड सूबेदार मेजर खड़क सिंह ने बताया कि 1977 में उन्होंने 26 राजपूत रेजीमेंट ज्वाइन की थी। 2005 में वह रिटायर हो गए थे। 1999 में उन्होंने कारगिल का युद्ध लड़ा था। उनकी पेंशन आ रही है। उनके लिए सबसे पहले भारत देश है।
अगर बॉर्डर पर जाकर लड़ने के लिए कहा जाता है तो वह इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं। बुच्चखेड़ी निवासी रिटायर सेना नायक सेठपाल सिंह ने बताया कि अप्रैल 1984 में उनकी ज्वाइनिंग पांच ग्रेनेडियर रेजीमेंट में हुई थी। 2001 में वह सेना से रिटायर हुए थे। 1999 कारगिल युद्ध के दौरान उनकी पोस्टिंग जम्मू कश्मीर बॉर्डर पर हुई थी। पाकिस्तान आतंकवादियों का सरपरस्त है। अगर देश को उनकी जरूरत है तो वह आज भी सीमा पर जाकर पाकिस्तान के विरुद्ध युद्ध लड़ने को तैयार हैं।