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धू-धू कर जले लंकापति रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले

Wed, 12 Oct 2016 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
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जलालाबाद (बायें) और थानाभवन (दायें) में जलता रावण का पुतला। - फोटो : अमर उजाला
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शामली में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक विजयादशमी का त्योहार जिले भर में धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर श्रीराम के बाण से रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले धू-धू कर जल उठे। दशहरा मेले में लोगों की भीड़ लगी रही। सांसद हुकुम सिंह ने कहा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन से   प्रेरणा लें।   
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मंगलवार को दोपहर बाद श्री हनुमानधाम पर विजयादशमी त्योहार पर मेले का आयोजन किया गया। इस मौके पर श्री रामलीला का भी मंचन किया गया। श्रीराम-लक्ष्मण का हरण करके अहिरावण पाताल लोक ले जाता है। संकट मोचन हनुमान बजरंग बली पाताल लोक पहुंचकर अहिरावण का वध करके श्रीराम-लक्ष्मण को लेकर लंका आते हैं। श्रीराम-रावण युद्ध  की लीला  का मंचन किया गया। श्रीराम ने अग्नि बाण चलाकर रावण, कुंभकरण, मेघनाद के पुतलों को दहन किया।

इस मौके पर कैराना के भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने हनुमानधाम पहुंचकर हनुमान जी की विशेष पूजा अर्चना की। श्रीरामलीला रंग मंच पर हनुमान धाम के प्रधान सलील द्विवेदी, मंत्री राजकुमार मित्तल, निकुंज मित्तल, वैद्य उपेंद्र द्विवेदी, कोषाध्यक्ष जोगेंद्रपाल सेठी, आदेश गर्ग, दिनेश पाठक, पुनीत द्विवेदी, रमेश धीमान, सुरेशचंद शर्मा, राजकुमार मलिक, अजय पाठक आदि ने  कैराना सांसद हुकुम सिंह का भव्य स्वागत किया।
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सांसद हुकुम सिंह ने राम लक्ष्मण  का  तिलक किया। आयोजकों की ओर से दिनेश पाठक ने सांसद हुकुम सिंह को स्मृति चिह्न देकर स्म्मानित किया। सांसद ने  विजयादशमी के त्योहार पर बुराई का त्यागकर श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। बुराई के खात्मे से अच्छे युग की शुरूआत होती है। विजयादशमी मेले में ग्रामीण क्षेत्र के बीस हजार लोगों ने हिस्सा लिया। मेले में महिलाओं, बच्चों और पुरुषों ने जमकर खरीदारी की। मेले में सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई थी। 

उधर , गढ़ीपुख्ता के मोहल्ला सुभाषपुरी में रामलीला ग्राउंड में चल रही रामलीला में श्रीराम रावण युद्ध होता है। श्रीराम बाण चलाकर रावण का वध करते हैं। रावण, कुंभकरण मेघनाद के पुतले धू-धू कर जल उठे। मंगलवार को कस्बे के सुभाष पुरी में कुंभकरण की लीला का मंचन होता है। अंत में कुंभकरण का वध होता है। इस दौरान मेघनाद व लक्ष्मण में पुन: युद्ध होता है, जिसमें मेघनाद मारा जाता है। मेघनाद की भुजा सुलोचना के महलों में फेंककर  मेघनाद का शीश लक्ष्मण जी अपने साथ लाते हैं। पति की मौत पर सुलोचना विलाप करती है। रावण  से रामादल में जाने की आज्ञा मांगती है। 

सुलोचना रामादल में जाती है जहां परीक्षा हेतु मेघनाद का कटा सिर हंसता है, तत्पश्चात सुलोचना अपने पति के साथ सती हो जाती है। इसके बाद राम-रावण का युद्ध होता है। श्रीराम के हाथों रावण का अंत होता है।  श्रीपाल जैन, नरेश कुमार सैनी, रामपाल सिंह, राजेंद्र शर्मा, भूषण लाल, टेकचंद, नीरज जैन अध्यक्ष, राजवीर सिंह, विकास सैनी, चरण सिंह, मैनपाल, नरेश गिरी, नेमचन्द सैनी मौजूूूद रहे। 
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