उत्तर प्रदेश के शामली में दशहरा महापर्व पर दशहरा मैदान पर रावण दहन के लिए रावण के पुतले बनाने का कार्य पिछले 60 वर्षों से थानाभवन क्षेत्र निवासी एक ही मुस्लिम परिवार करता आ रहा है। कोरोना महामारी के बाद इस बार 50 फुट का रावण का पुतला बनाया गया है। पुतला बनाने वाला परिवार अपने काम के पैसे तय नहीं करता, केवल इनाम के रूप में जो पैसा कमेटी देती है, उसी को स्वीकार कर लेता है।
कोरोना काल के दो वर्षों में दशहरा मेला नहीं लगा और न ही रावण दहन हुआ। पिछले वर्ष चौक बाजार में रामलीला तो नहीं हुई थी फिर भी 18 फुट के रावण के पुतले का दशहरा मैदान पर दहन हुआ था। इस वर्ष चौक बाजार रामलीला कमेटी ने 50 फुट का रावण का पुतला और लंका बनवाई है। जिसे अफजाल के परिवार ने तैयार किया है।
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अफजाल ने बताया रावण के पुतले का कार्य उसके दादा जिमू और फतेहदीन लगभग साठ साल पहले से करते आ रहे थे। उनके बाद पिता फिरोज, ताऊ नफीस और चाचा सईद ने यह कार्य किया। अब उनकी पीढ़ी कर रही है। उन्होंने नानौता, रामपुर, गंगोह के साथ हरियाणा में भी रावण के पुतले बनाकर भेजे हैं।
इस वर्ष जलालाबाद व थानाभवन में रावण के पुतले बनाए हैं। दोनों ही स्थान उनकी कर्म भूमि है। यह उनकी तीसरी पीढ़ी है जो यह कार्य कर रही है। पुतला बनाने में 10 से 15 दिन लग जाते हैं। इस बार का रावण का पुतला आकर्षक होगा। रावण की मूंछें देखने लायक होंगी। पुतले बनाने में बांस सुतली, कपड़ा, कागज, रंग व अबरी कागज और पराली का प्रयोग किया जाता है। इस वर्ष रावण का पुतला बनाने में परिवार के उस्मान, सऊद, परवेज, आसिफ, लुकमान आदि साथ लगे रहे।