शामली हनुमान धाम पर रामलीला का मंचन करते कलाकार
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शामली। धर्म हेतु अवतेरहु गोसाईं, मारेहु मोहि ब्याध की नाईं।
मैं बैरी सुग्रीव पिआरा, अवगुन कवन नाथ मोहि मारा॥
भावार्थ : हे गोसाईं! आने धर्म की रक्षा के लिए अवतार लिया है और मुझे व्याध की तरह (छिपकर) मारा? मैं वैरी और सुग्रीव प्यारा? हे नाथ! किस दोष से आपने मुझे मारा?
श्री मंदिर हनुमान टीला रामलीला महोत्सव में शुक्रवार की रात श्री हनुमान जन्म सुग्रीव मित्रता और बालि वध लीला का मंचन किया गया। श्रीरामलीला रंगमंच पर श्री हनुमान बजरंग बली जी की भव्य झांकी प्रस्तुत की गई। मुख्य अतिथि पूर्व विधायक राजेश्वर कुमार बंसल ने तिलक और महाआरती की। श्रीहनुमान धाम के अध्यक्ष सलील द्विवेदी, महामंत्री राजकुमार मित्तल, जोगेंद्र पाल सेठी सहित रामलीला के निर्देशकों, कलाकारों, सेेवादल के पदाधिकारियों ने हनुमान जी को तिलक किया।
इसके बाद रामलीला मंचन में राम और लक्ष्मण माता सीता को ढूंढते हुए ऋषि मुख पर्वत के पास आते हैं, जहां उनकी भेंट हनुमान जी से होती हैं। हनुमान जी सुग्रीव से राम की मित्रता कराते है। इस प्रकार दोनों एक दूसरे की सहायता के लिए तैयार हो जाते है। सुग्रीव और बालि का युद्ध होता है। अंत में भगवान राम के तीर से बालि की मृत्यु होती है। मरते-मरते बालि भगवान श्रीराम से क्षमा याचना करता है और पूछता है कि हे गोसाईं! मैं वैरी और सुग्रीव प्यारा? हे नाथ! किस दोष से आपने मुझे मारा?। इसके बाद वह भगवान की स्तुति करता हैं और अपने पुत्र अंगद को उनको सौंप देता है। श्री हनुमान जी का अभिनय राधेश्याम मित्तल, श्रीराम का रवि पाठक, लक्ष्मण का आशुतोष पाठक, बालि का विजय झंझोट, सुग्रीव का वासु भंवरा, अंगद का भागवत पाठक ने शानदार अभिनय किया।