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राजेंद्र मलिक नहीं हैं गठवाला खाप के चौधरी : बाबा महिपाल

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शामली क्षेत्र के गांव हसनपुर में प्रैस वार्ता करते चौधरी महिपाल सिंह मलिक - फोटो : SHAMLI
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राजेंद्र मलिक नहीं हैं गठवाला खाप के चौधरी : बाबा महिपाल
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शामली। गांव हसनपुर निवासी सेवानिवृत्त पुलिस कर्मी महिपाल मलिक को गठवाला खाप के नए थांबेदार बनाए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद बढ़ता ही जा रहा है। रविवार को गठवाला खाप के चौधरी ने हसनपुर में पंचायत कर उनकी पगड़ी को अमान्य घोषित कर दिया था। अब महिपाल मलिक ने बाबा राजेंद्र सिंह मलिक की चौधराहट पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को अपने आवास पर प्रेस वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि बाबा राजेंद्र मलिक गठवाला खाप के चौधरी ही नहीं हैं। राजेंद्र मलिक को उनकी पगड़ी अमान्य घोषित करने का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि 31 अक्टूबर को उन्हें 11 गांवों के लोगों ने गठवाला खाप के लिसाढ़ थांबे का थांबेदार बनाया गया था। रविवार को उनके गांव में उनकी गैर मौजूदगी में बाबा राजेंद्र सिंह मलिक ने पंचायत कर उनकी थांबेदार की पगड़ी को अमान्य घोषित कर दिया था। जबकि राजेंद्र मलिक को इसका कोई अधिकार नहीं है। बाबा राजेंद्र मलिक गठवाला खाप के चौधरी नहीं हैं, उनकी चौधराहट चौधरान पट्टी में है। उन्होंने कहा कि बाबा राजेंद्र सिंह हरियाणा के गांव हुलाना जाकर बाबा बलजीत सिंह से अपना रिकार्ड दिखवाएं। अगर बाबा बलजीत सिंह कहते हैं कि चौधरान पट्टी में चौधराहट है तो हम स्वीकार कर लेंगे। उन्होंने कहा कि हमने अपने सभी गांवों और थांबेदरो से बात की है, सबका यही कहना है कि बाबा राजेंद्र मलिक गठवाला खाप के चौधरी नहीं हैं। हालांकि इस दौरान चौधरी महिपाल मलिक अपने दावे का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं दे पाए। इस मौके पर विरेंद्र सिंह, मास्टर इंद्रपाल सिह, निरंजन सिंह, नरेंद्र सिंह, जयपाल सिंह, पूर्व प्रधान कवरपाल सिंह, जसवीर सिंह, यशवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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वहीं, इस पूरे मामले में गठवाला खाप के थांबेदार बाबा श्याम सिंह का कहना है कि बाबा चौधरी महिपाल मलिक को 11 गांव की सहमति से गठवाला खाप का थांबेदार घोषित किया था। बाबा राजेंद्र मलिक को इस तरह उनकी पगड़ी को अमान्य घोषित करने कोई अधिकार नहीं है। इसका निर्णय 11 गांव करेंगे।
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---- कोट
ये लोग बौखलाहट में गलत बयानबाजी कर रहे हैं। समाज में उपद्रव फैलाकर तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। गठवाला खाप की पगड़ी किसके पास है, ये लोग ही बता दें। इन्हें बाबा बलजीत सिंह से ही पूछ लेना चाहिए था। इससे पहले बाबा हरिकिशन मलिक चौधरी रहे, इनकी बयानबाजी से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है - गठवाला बाबा राजेंद्र सिंह मलिक।
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