शामली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए नियमों के विरोध में जिले में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को सवर्ण समाज संघर्ष समिति और अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, अन्य संगठनों ने नए कलक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। साथ ही राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम अरविंद कुमार चौहान को सौंपा।
धरना-प्रदर्शन में संगठनों के पदाधिकारी और सैकड़ों लोग शामिल हुए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यूजीसी के नए नियम तुरंत वापस नहीं लिए तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। ज्ञापन में कहा गया कि ये नियम शिक्षा में समान अवसर प्रदान करने के बजाय भेदभाव को बढ़ावा दे रहे हैं। इससे सामान्य वर्ग के छात्रों का भविष्य असुरक्षित हो सकता है। वहीं ओबीसी, एससी, एसटी व सामान्य वर्ग के छात्रों के बीच आपसी मतभेद, द्वेष भावना और सामाजिक असमानता बढ़ने की प्रबल आशंका है।
विरोध प्रदर्शन की अध्यक्षता कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा ने की। संचालन योगेश भारद्वाज और अजेश ने संयुक्त रूप से किया। ओमप्रकाश शर्मा ने कहा कि यूजीसी कानून छलावा है और सवर्ण समाज के छात्रों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के पवन कुमार चौहान ने कहा कि यूजीसी के नियम 15 जल्द प्रभावी किए जा रहे हैं, जो गंभीर संवैधानिक और विधिक प्रश्न खड़े करते हैं। भले ही इन नियमों को जाति आधारित भेदभाव रोकने के उद्देश्य से लाया गया बताया जा रहा हो, लेकिन उच्च शिक्षा संस्थानों में नई असमानता पैदा होने की आशंका है। इस अवसर पर लाखन सिंह, प्रेम किशोर कठोरी, शेरसिंह राणा, नीरज वशिष्ठ, मनोज चौहान, वैभव गर्ग, दीपांशु वशिष्ठ, सत्यप्रकाश कौशिक, यशपाल सरपंच मौजूद रहे। कांग्रेस और किसान संगठनों के लोग भी धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए। किसान-मजदूर संगठन, लक्ष्य फाउंडेशन ट्रस्ट और ब्राह्मण एकता महासभा के सदस्य भी मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने यूजीसी के विरोध में अपने घरों पर पोस्टर लगाए
बाबरी। बाबरी क्षेत्र के गांव कैड़ी में कुछ ग्रामीणों ने यूजीसी के विरोध में पोस्टर लगाकर अपना आक्रोश जताया। इन पोस्टरों में भाजपा नेताओं से चुनाव के दौरान वोट मांगने के लिए गांव में न आने की अपील की गई।
गांव के निवासी प्रदीप गुप्ता, हरेंद्र राणा, ठाकुर संजय सिंह सहित अन्य लोगों ने अपने घरों पर विरोधी पोस्टर लगाए। ग्रामीणों का कहना है कि यूजीसी से जुड़े हालिया निर्णय सामान्य वर्ग के हितों के विपरीत हैं, जिससे उनके भविष्य और अधिकारों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।