शामली। जिले के भैसवाल, कांधला और जलालाबाद में ताइवानी तरबूज और खरबूजा की खेती किसानों के लिए मुनाफा का सौदा साबित हो रही है। इन तरबूज और खरबूजे की दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों की मंडियां में अच्छी खासी मांग है। यह अत्यधिक मीठा होने के कारण इसका भाव भी अच्छा मिल रहा है।
भैंसवाल गाव में बीस बीघा, कांधला क्षेत्र के भारसी गांव में दस बीघा और जलालाबाद में दस बीघा में ताइवान प्रजाति के तरबूज और खरबूजों की खेती हो रही है। भैसवाल के पूर्व प्रधान जिपं सदस्य प्रगतिशील किसान उमेश पंवार ताइवान के तरबूज और खरबूजा की खेती कर रहे है। उनके अनुसार जौनपुरिया और गंगा यमुना क्षेत्र का बोबी और मधु पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रसिद्ध है। ताइवान के खरबूजा और तरबूज की मिठास और स्वाद ने सभी को पीछे छोड़ दिया है। ताइवान का आरोही तरबूज अंदर से पीला स्वाद में अनानास जैसा है। जन्नत तरबूज अंदर से लाल और मीठा है। ताइवान का मृदला खरबूजा अंदर से पीला बाहर से जालीदार पूर्वी और पश्चिमी हवाओं में मीठा रहता है। ताइवान के तरबूज और खरबूजा 30 दिन की फसल है। छह हजार रुपये प्रति बीघा लागत आती है। इसमें पौध तैयार करने और पानी, फल तुड़ाई में मजदूरी की लागत शामिल है।
सामान्य तरबूज और खरबूजा सात और आठ से लेकर दस रुपये प्रति किलो मंडियाें में मिल जाता है। ताइवान का तरबूज और खरबूजा 15-20 रुपये से लेकर 35- 40 रुपये किलो तक बिक रहा है। कीट से फसल को बचाव के लिए यंत्र लगाए है। दूसरी ओर कांधला क्षेत्र के भारसी गांव के जिपं सदस्य अरविंद कुमार के अनुसार ताइवानी खरबूजा और तरबूज की फसल कम लागत में अच्छा पैसा दे रही है। वह पानीपत, दिल्ली मंडी में खरबूजा और तरबूज बिक्री के लिए ले जाते है। हाथों हाथ बिक जाता है। संवाद
तीन माह में खरबूजा और तरबूज हो रहे तैयार
किसान उमेश पंवार बताते है कि तरबूज और खरबूजे की अगेती प्रजाति का बीज हरियाणा के करनाल और पानीपत के सिंभालका में 70 हजार रुपये किलो मिलता है। अगेती प्रजाति के तरबूज और खरबूजा के बीज की हाईटेक नर्सरी में पौध तैयार होती है। दिसंबर से लेकर जनवरी में खरबूजा और तरबूज की रोपाई होती है। 90 दिन में अप्रैल माह मेेंं फसल तैयार होती है। उन्होंने प्रगतिशील किसान के लिए फलों के संरक्षण के लिए शीत ग्रह स्थापित करने और बासमती धान की तर्ज पर खरीद की व्यवस्था की मांग की है।
ताइवान की ओर प्रगतिशील किसानों का बढ़ा रुझान
कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक डाॅ. ओमकार सिंह का कहना है कि ताइवान प्रजाति के पपीता, अमरूद और खरबूजा और तरबूज की ओर जिले के किसान आकर्षित होकर फसल में मुनाफा कमा रहे है। दस प्रतिशत किसान विदेशी प्रजापति की खेती कर रहे है। ताइवान की प्रजाति देश की वैरायटी से अच्छी और स्वाद अच्छा है।