शुक्रवार को शादी का जबर्दस्त साया था। विभिन्न मार्गों पर चलने वाली आधी से अधिक प्राइवेट बसें बरात में बुक थी और सड़कों पर यात्री बेहाल। दोपहर बाद तो हालत ओर खराब हो गई। अमर उजाला टीम ने शाम को पांच से छह बजे के बीच शहर के बस अड्डों के बाहर का हाल जाना । प्राइवेट अड्डे खाली थे और सैकड़ों यात्री बाहर खड़े नजर आए।
कैराना बस अड्डा
यहां से कैराना ,ऊन, चौसाना, बिडौली झिंझाना ,बुढ़ाना आदि मार्ग की प्राइवेट बसें मिलती हैं। शाम को यहां पर किसी भी मार्ग की बसें नहीं थी। बस अड्डे के बाहर करीब 200 से ज्यादा यात्री बस के इंतजार में थे। कैराना के कामिल, झिंझाना के शौकीन, बुढ़ाना के राजीव आदि ने बताया कि करीब सवा घंटे से यहां बस नहीं मिली है। बस अड्डे पर प्राइवेट बस संचालकों ने बताया कि अधिकांश बसें शादियों में बुक हैं। इस वजह से शाम को नौकरी पेशा लोग काफी परेशान रहे।
दिल्ली रोडवेज बस अड्डा
यहां से कांधला ,बड़ौत, बागपत, खेकड़ा, लोनी मोड़ तक 45 मिनी बसें चलती हैं, लेकिन शाम को यहां भी बसें नहीं थी। रोडवेज बसें चल रही थीं। हालांकि इन बसों में बीच के गांव वाले यात्रियों को नहीं बैठाया जाता। इस कारण बीच रास्ते के ग्रामीण इन्हीं बसों के भरोसे हैं, लेकिन ये बसें भी अधिकांश शादी में बुक थी और यात्री परेशान।
विजय चौक
यहां पर विजय सिनेमा के बाहर सहारनपुर की ओर से आने वाली कैराना, पानीपत आदि स्थानों की बसें मिलती हैं, लेकिन यहां भी यात्रियों की भीड़ थी और बसें गायब थी। यहां भी सौ से अधिक यात्री बस के इंतजार में थे। कैराना के शौकीन ने बताया कि केवल एक घंटे पहले रोडवेज आई थी। प्राइवेट बस कोई नहीं आई। सब यात्री बेहाल रहे।
भूसे की तरह भरकर ले गए डग्गामार
प्राइवेट बसें बंद होने का डग्गामारों ने पूरा फायदा उठाया। डग्गामारी में चल रहे ये वाहन भूसे की तरह भरकर यात्रियों को ले जा रहे थे। एक जीप के अंदर करीब 14 -15 सवारियां थी। कई सवारी लटकी हुई थी। छत पर बैठने तक को लोग तैयार थे। लोगों ने बताया कि बस नहीं है तो मजबूरी में जान जोखिम में डालकर भी सफर करना पड़ेगा।