शामली। इस बार मानसून की रफ्तार काफी अच्छी है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जून के आखिरी सप्ताह में मानसून दस्तक दे सकता है। हालांकि अगले तीन-चार दिन भी बारिश होने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन यह प्री-मानसून है। धान की नर्सरी (पौध) तैयार कर रहे और रोपाई की तैयारी कर रहे किसानों के लिए यह बारिश काफी लाभदायक साबित होगी। मौसम वैज्ञानिक इस बार अच्छी बारिश होने की संभावना जता रहे हैं। इससे भी धान की फसल को लाभ होगा।
सामान्य तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मानसून जुलाई के प्रथम सप्ताह में आता है, लेकिन इस बार मानसून के 27 से 29 जून तक आने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञ आगामी कुछ दिनों में बारिश होने की संभावना जता रहे हैं। यह प्री-मानसून की बारिश बताई जा रही है।
कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के प्रभारी डॉ. पीके सिंह का कहना है कि उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश में मानसून के 22 जून तक प्रवेश करने का अनुमान है। इसके बाद को मानसून की रफ्तार को देखकर पता लगेगा कि प. उप्र में कम तक पहुंचेगा। 29 से 29 जून तक मानसून पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आने की संभावना है।
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धान की नर्सरी लगभग तैयार, अब रोपाई की तैयारी
शामली। जनपद में धान कर रकबा लगभग साढ़े पांच हजार हेक्टेयर रहता है। धान उगाने वाले लगभग 60 प्रतिशत किसानों ने नर्सरी तैयार कर ली है जबकि 40 प्रतिशत किसान अभी नर्सरी डाल रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी डॉ. हरिशंकर सिंह का कहना है कि कुछ किसान पछेती धान लगाते हैं। जिले में किसान जून के आखिरी सप्ताह तक नर्सरी डालते हैं, जबकि जुलाई में रोपाई हो जाती है जबकि अगेती प्रजाति लगाने वाले किसानों ने नर्सरी तैयार कर ली है और रोपाई की तैयारी कर रहे हैं। वह बताते हैं धान की नर्सरी लगभग 20 दिनों की डाली जाती है।
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पकने को तैयार साठी धान की फसल
शामली। जिले के ऊन ब्लॉक क्षेत्र में काफी संख्या में किसान साठी धान उगाते हैं। भूगर्भ जलस्तर के नुकसानदायक होने के बावजूद यह फसल उगाई जाती है। चौसाना क्षेत्र के यमुना खादर में बिड़ौली, नाईनंगला, सकौती, कमालपुर, खोड़समा, ऊदपुर, जिजौला, चौसाना, चौसाना जदीद, गढ़ी हसनपुर, भड़ी, टोड़ा समेत कई गांवों में साठी धान की फसल उगाई जाती है। कुछ खेतों में बोई गई फसल में तो बालियां भी निकल आईं हैं। यह फसल 60 दिन में तैयार हो जाती है तथा किसान इसे काटने के बाद धान की फसल दोबारा बो देते हैं। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि साठी धान की फसल भूजल स्तर के लिए नुकसानदायक है। इसलिए कृषि विभाग इसकी बुवाई की संस्तुति नहीं करता।
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200 क्विंटल मिला बीज, 50 प्रतिशत अनुदान
शामली। कृषि विभाग को इस बार धान का बीपी 1509 प्रजाति का 200 क्विंटल बीज मिला है। यह बीज पांचों ब्लॉकों में बिक्री के लिए उपलब्ध है। धान के बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान डीबीटी के माध्यम से किसानों के खातों में भेजा जाएगा। फिलहाल किसानों को यह बीज 3580 रुपये प्रति क्विंटल की दर से लेना पड़ रहा है जबकि 50 प्रतिशत अनुदान राशि खाते में भेजी जाएगी।