गन्ना भुगतान की मांग को लेकर 11 दिन से शामली मिल में चल रहा किसानों का धरना शनिवार की शाम स्थगित कर दिया गया। गन्ना विकास मंत्री के निर्देश पर डीएम ने चालू पेराई सत्र के 15 करोड़ का भुगतान 31 जनवरी और पिछले सत्र का मय ब्याज बकाया भुगतान 11 फरवरी तक कराने का आश्वासन दिया। किसानों की 11 सदस्यीय कमेटी से हुई इस सहमति के बाद धरना स्थगित कर दिया गया।
बता दें कि धरने पर बैठे किसान पिछले सीजन का करीब 80 करोड़ मय ब्याज और वर्तमान पेराई सत्र का 14 दिन को छोड़कर भुगतान कराने की मांग पर अड़े थे। इसे लेकर किसान, मिल और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कई बार वार्ता हुई, मगर सहमति नहीं बनी। शुक्रवार को करीब ढाई घंटे गन्ना विकास मंत्री सुरेश राणा की मौजूदगी में प्रशासन और किसानों में वार्ता हुई थी। इसमें भी कोई ठोस परिणाम नहीं निकला था। हालांकि मंत्री से वार्ता करने पहुंची किसानों की 11 सदस्यीय कमेटी के कुछ सदस्यों से सकारात्मक रुख दिखाया था। उन्होंने प्रशासन के सुझाव पर बाकी किसानों से वार्ता की बात कही थी। शनिवार को प्रदेश के गन्ना विकास मंत्री सुरेश राणा के निर्देश पर डीएम ने किसानों की कमेटी को फिर से वार्ता को बुलाया। किसान नेता देशपाल राणा और बाबूराम पंवार के अनुसार डीएम ने प्रस्ताव दिया कि किसानों का पिछले सीजन का बकाया गन्ना मूल्य भुगतान ब्याज सहित करीब 105 करोड़ 11 फरवरी तक मिल द्वारा करा दिया जाएगा। चालू पेराई सत्र का भी 15 करोड़ का गन्ना मूल्य भुगतान मिल 31 जनवरी तक कर देगी। हालांकि कमेटी के सदस्य 31 जनवरी तक पूरा भुगतान चाहते थे लेकिन बाद में सहमति बन गई। इसके बाद डीएम अलिखेश सिंह और एसपी अजय कुमार शनिवार की शाम धरनारत किसानों के बीच पहुंचे और कमेटी से हुई वार्ता और अपने प्रस्ताव की जानकारी दी। इसके बाद किसानों ने आपस में बातचीत करने के बाद धरना स्थगित करने की घोषणा कर दी।
स्थगित किया है, खत्म नहीं
किसान नेताओं ने ये भी साफ कर दिया कि वे प्रशासन के भरोसे पर अपना धरना स्थगित कर रहे है खत्म नहीं। यदि दिए गए आश्वासन के अनुसार समय पर भुगतान नहीं होता तो किसान आगे का निर्णय भी ले सकते हैं। धरना फिर से शुरू किया जा सकता है।
फिलहाल मिल चलने की उम्मीद नहीं
शामली। किसानों ने भले ही अपना धरना स्थगित कर दिया हो लेकिन शुगर मिल चालू होने की फिलहाल कोई स्थति नजर नहीं आ रही। मिल अफसरों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर और शासन से जारी आरसी के चलते मिल प्रशासन फिलहाल मिल चालू करने के मूड में नहीं लग रही। शुगर मिल के एजीएम नरेश कुमार ने बताया कि मिल 16 जनवरी की रात से बंद है। मिल चालू करने में भी एक दिन लगेगा। मगर, इसे चालू करने के लिए अभी तक मिल प्रबंधन स्तर से कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं। उनके दिशा निर्देश के बाद ही मिल चलाना संभव होगा। उधर, मिल सूत्रों के अनुसार शुगर मिल प्रबंधन चाहता है कि मिल अफसरों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस हो और साथ ही मिल के खिलाफ जारी आरसी भी सरकार वापस लें। क्योंकि आरसी जारी होने का मतलब कुल बकाया पर 10 प्रतिशत रिकवरी चार्ज तहसील को भी देना होगा। अफसरों पर एफआईआर में दर्ज गंभीर धाराओं के चलते जमानत भी आसानी से मिलनी मुश्किल है। लिहाजा मिल प्रशासन भी अब एफआईआर और आरसी वापसी की शर्त प्रशासन के समक्ष रख सकता है। गौरतलब है कि धरने के दौरान मिल प्रबंधन प्रशासन से पहले ही मिल बंदी की अनुमति मांग चुका है।