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दावे, घोषणाएं खूब, धरातल पर नहीं मिल रही स्वास्थ्य सुविधाएं

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शामली के जिला अस्पताल के एसएनसीयू में रखी मशीनें - फोटो : SHAMLI
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शामली। शासन-प्रशासन मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे और घोषणाएं तो खूब कर रहा है, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही दिखाई रही है। मरीजों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। कहीं स्टाफ की कमी है तो कहीं उपकरण नहीं हैं। जिस कारण मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में महंगा उपचार और जांच कराने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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28 सितंबर 2011 में शामली को जिले का दर्जा प्राप्त हुआ था। जिला बनने के बाद लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन अभी भी पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। शासन प्रशासन ने जिला संयुक्त चिकित्सालय बनने पर मरीजों के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की उम्मीद जगी थी। 22 पुरुष चिकित्सक, 12 महिला चिकित्सक, 26 स्टाफ नर्स और स्टाफ समेत 127 पद सृजित किए गए। पूर्वी यमुना नहर किनारे गांव मुंडेट के निकट करीब साढ़े 39 करोड़ रुपये की लागत से जिला संयुक्त चिकित्सालय का भवन बनकर तैयार हुआ। कार्यदायी संस्था ने सितंबर 2020 को यह भवन स्वास्थ्य विभाग के सुपुर्द कर दिया था।
इसके बाद कोरोना संक्रमण के चलते कोविड अस्पताल बनाया गया। कोरोना कम होने पर पिछले साल 16 अगस्त 2021 में दो चिकित्साधिकारी से ओपीडी शुरू कर जिला अस्पताल चालू किया गया, लेकिन संसाधनों, चिकित्सकों और स्टाफ की कमी के चलते मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही है। जिला अस्पताल में जो मशीनें लगी हैं, वे चिकित्सकों व स्टाफ की कमी से धूल फांक रही हैं और उनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। अल्ट्रासाउंड व सीटी स्कैन जैसी सुविधाएं भी यहां उपलब्ध नहीं हैं।
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एक्सरे मशीन दो, रेडियोलोजिस्ट न तकनीशियन
जिला संयुक्त चिकित्सालय में शासन से दो एक्सरे मशीन मिली है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सीएचसी से एक तकनीशियन को अटैच कर एक्सरे मशीन का इस्तेमाल किया गया। उसके बाद मशीन का इस्तेमाल नहीं हुआ। करीब तीन माह पहले एक्सरे की दूसरी मशीन मिली, लेकिन रेडियोलोजिस्ट व तकनीशियन की नियुक्ति न होने से मरीजों को इन मशीनों का लाभ नहीं मिल रहा है।
एसएनसीयू को चिकित्सक व स्टाफ का इंतजार
जिला संयुक्त चिकित्सालय में सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) करीब डेढ़ साल पहले तैयार की गई थी। इसमें नवजात शिशुओं की देखभाल व उपचार के लिए 14 रेडिएंट वार्मर और छह फोटो थेरेपी मशीनें लगाई गई है। बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से इन मशीनों का लाभ नहीं मिल रहा है। महिला चिकित्सक न होने से जिला अस्पताल में डिलीवरी तक की सुविधा भी शुरू नहीं हो पाई है।
आई सर्जन दो, ऑपरेशन की मशीन नहीं
जिला अस्पताल में दो आई सर्जन की तैनाती हो चुकी है और ऑपरेशन थियेटर भी बनाया गया है, लेकिन आंखों के आपरेशन के लिए मशीनें नहीं मिली है। इस वजह से मरीजों को आंखों के ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल रही है।
कोट
जिला अस्पताल में अभी तक आठ चिकित्सकों की नियुक्ति हुई है। एक्सरे की दो मशीनें हैं, लेकिन रेडियोलोजिस्ट व तकनीशियन नहीं है। एसएनसीयू वार्ड में मशीनें लगी है, लेकिन चिकित्सक न होने से चलाई नहीं जा रही है। महिला चिकित्सक न होने से डिलीवरी शुरू नहीं हुई है। इनके संबंध में शासन को कई बार पत्राचार कर अवगत कराया जा चुका है। सीएमएस, डॉ. सफल कुमार
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