लॉकडाउन में मानवता की मदद को उमड़े लोग
शामली। एक साल पहले जनपद में जब हर तरफ कोरोना का खौफ था। लॉकडाउन में लोग घरों में थे। सड़कें, गलियां और मोहल्ले सुनसान पड़े थे। बाजारों में दुकानें बंद रहने से सन्नाटा पसरा था। काम धंधे बंद हो गए थे। ऐसे संकट के दौर में गरीब परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। ऐसे माहौल में जरूरतमंदों की मदद को शहर के उद्यमी, व्यापारी, सामाजिक संगठनों के लोग मानवता की मदद करने के लिए आगे आकर उनके लिए राशन, भोजन, मास्क और सैनिटाइजर आदि उपलब्ध कराया था। कोरोना काल में जरूतमंदों की मदद करने वाले लोगों से बातचीत की गई। उनका कहना था कि संकट के दौर में इंसान ही इंसान की मदद करता है।
गरीबों की मदद को आगे आए डॉक्टर दंपती
अमर उजाला फाउंडेशन के साथ मां सावित्री हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्सक डॉ. रीतिनाथ शुक्ला और उनकी पत्नी डॉ. नीलम शर्मा ने कोरोना काल में दो माह से अधिक समय तक लगातार गरीब परिवारों और जरूरतमंदों को उनकी बस्ती में पहुंचकर राशन किट, भोजन, इम्युनिटी बूस्टर, सैनिटाइजर और मास्क उपलब्ध कराया। गरीब परिवारों का निशुल्क इलाज कर उनकी मदद की। डॉ. रीतिनाथ शुक्ला ने कहा कि संकट के दौर में जरूरतमंदों की मदद करना पुनीत कार्य है।
केमिस्ट एसोसिएशन ने मास्क और सैनिटाइजर दिए
शामली केमिस्ट एसोसिएशन शामली के जिलाध्यक्ष देवराज मलिक ने बताया कि एक साल पहले कोरोना संक्रमण को लेकर लोग दहशत में थे। ऐसे में लोगों को संक्रमण से बचाव करना जरूरी था। उनकी संस्था ने उस समय दो लाख एक हजार रुपये का चेक डीएम राहत कोष में दिया और करीब 72 हजार कीमत के ग्लूकोज, मास्क, सैनिटाइजर और गरीबों को भोजन उपलब्ध कराया गया था।
प्रभु की रसोई से शांत हुई गरीबों की भूख
शहर में बुढ़ाना रोड पर रोडवेज बस स्टैंड के निकट शामली अन्नपूर्ण ट्रस्ट द्वारा प्रभु की रसोई चलती है, जिसमें दोनों समय गरीबों को भोजन खिलाया जाता है। रसोई के सेवादार प्रदीप कुमार ने बताया कि पिछले साल कोरोना काल में जब सब कुछ बंद था, उस समय भी प्रभु की रसोई में दोपहर व शाम दोनों समय भोजन बनता था। रोजाना चार से पांच हजार गरीबों के लिए भोजन बनता था। इनमें करीब एक हजार भोजन के पैकेट तैयार कर जरूरतमंदों तक पहुंचाए जाते थे।
उद्यमी, व्यापारी भी मदद को आए आगे
शामली इंडस्ट्रीयल स्टेट मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकित गोयल ने बताया कि एक साल पहले कोरोना संकट काल में करीब दो माह तक सीबी गुप्ता कॉलोनी में रसोई चलाई गई। रोजाना करीब 800 पैैकेट भोजन के दोनों समय तैयार कर प्रशासन के माध्यम से जरूरतमंदों को वितरित कराए गए। आईआईए की तरफ से भी रोजाना भोजन के 600 पैकेट तैयार कर वितरण कराया जाता था।
शामली लॉकडाउन के दोरान प्रभू की रसोई में खाना खाते लोग- फोटो : SHAMLI